NEET विवाद पर जयराम रमेश का केंद्र पर हमला, शिक्षा सचिव की नियुक्ति और CBI जांच पर उठाए सवाल
NEET-UG विवाद और पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस ने एक बार फिर केंद्र सरकार को घेरा है। कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने उच्च शिक्षा विभाग में नए सचिव की नियुक्ति, NEET-UG 2024 मामले की CBI जांच और सरकार की हालिया घोषणाओं को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर जवाबदेही तय करने के बजाय केवल घोषणाएं कर रही है।
उच्च शिक्षा सचिव की नियुक्ति पर उठाए सवाल
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि पिछले 24 घंटों में हुई दो घटनाओं ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने नए उच्च शिक्षा सचिव नरेश पाल गंगवार की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उनके परिवार के सदस्यों ने उस समय कृषि मंत्रालय की सब्सिडी योजनाओं का लाभ लिया था, जब वह पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन विभाग में वरिष्ठ पद पर कार्यरत थे। कांग्रेस नेता ने इस मामले में पारदर्शिता की मांग की।
CBI की जांच और संजीव मुखिया को लेकर भी निशाना
कांग्रेस सांसद ने NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले में CBI की जांच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस संजीव मुखिया को पहले जांच में कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा था, बाद में उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही गई। जयराम रमेश ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर चिंता जताई। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संजीव मुखिया की पत्नी पहले लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी हैं।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट की घोषणा पर भी उठाई आपत्ति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने की घोषणा पर भी जयराम रमेश ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानूनों के तहत भी विशेष अदालतों का गठन किया जा सकता है और इसके लिए अलग से नई व्यवस्था की आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, केवल अदालतों की घोषणा पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि निष्पक्ष और समयबद्ध जांच भी उतनी ही जरूरी है।
सरकार से जवाबदेही की मांग
कांग्रेस नेता ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। साथ ही उन्होंने मांग की कि जांच एजेंसियां पूरी निष्पक्षता के साथ काम करें और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।