जयपुर में ऑक्सीजन गैस सिलेंडर ब्लास्ट झारखंड निवासी मजदूर की मौत, फैक्ट्री मैनेजर समेत दो घायल
💥 विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया में जोरदार धमाका
जयपुर के विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र (VKI) में शनिवार शाम एक ऑक्सीजन गैस सिलेंडर फैक्ट्री में भीषण धमाका हो गया। ब्लास्ट इतना तेज था कि फैक्ट्री की टीन शेड उड़ गई और एक दीवार भरभराकर गिर गई। हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
🕗 शाम करीब 8 बजे हुआ हादसा
पुलिस के अनुसार यह घटना शनिवार शाम करीब 8 बजे करणी विहार कॉलोनी, रोड नंबर 17 स्थित गैस प्लांट में हुई। सिलेंडर में अचानक विस्फोट हुआ, जिससे फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
🕯️ झारखंड निवासी युवक की मौत
धमाके में फैक्ट्री में काम कर रहे झारखंड निवासी युवक मुन्ना राय की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक मजदूर के शव को पुलिस ने मलबे से बाहर निकालकर पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया।
🚑 मैनेजर समेत दो कर्मचारी घायल
हादसे में फैक्ट्री मैनेजर विनोद गुप्ता (45), निवासी मुरलीपुरा (खेतान हॉस्पिटल के पास) और कर्मचारी शिबू उर्फ अनुवा पुत्र सलीम घायल हो गए। शिबू झारखंड के बोकारो जिले के नागटीटी गांव का रहने वाला है। दोनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
🚒 दमकल और पुलिस ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन
धमाके की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। फैक्ट्री में लगी आग को बुझाया गया और मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।
🏪 दुकानों के शटर टूटे, घरों में आई दरारें
तेज विस्फोट के कारण आसपास की कई दुकानों के शटर क्षतिग्रस्त हो गए। कुछ रिहायशी मकानों में दरारें भी आ गईं। फैक्ट्री की सीमेंट की चादरें उछलकर काफी दूर तक जा गिरीं, जिससे लोगों में दहशत फैल गई।
😡 स्थानीय लोगों का विरोध, फैक्ट्री बंद करने की मांग
घटना के बाद फैक्ट्री के आसपास रहने वाले लोगों ने कड़ा विरोध जताया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि रिहायशी इलाके में इस तरह की फैक्ट्री से उनकी जान खतरे में है। लोगों ने प्रशासन से फैक्ट्री को बंद कराने की मांग की।
🔍 पुलिस जांच में जुटी
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि विस्फोट तकनीकी खामी, मेंटेनेंस की लापरवाही या सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के कारण हुआ।
🔎 रिहायशी इलाकों में औद्योगिक इकाइयों पर सवाल
यह हादसा एक बार फिर रिहायशी क्षेत्रों में चल रही गैस और केमिकल फैक्ट्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर ऑडिट और सख्त निगरानी नहीं होने से ऐसे हादसे दोहराए जाते हैं।