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राजस्थान के 3 बड़े नगर निगमों में मेयर के नाम पर आखिरी वक्त तक मंथन, जयपुर में सुनील कोठारी तो जोधपुर-कोटा में भी चौंकाने वाले नाम

जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम में मेयर चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने नामांकन के आखिरी दिन अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित किए। तीनों शहरों में अंतिम समय तक नामों को लेकर मंथन चलता रहा। जयपुर में भाजपा ने सुनील कोठारी को प्रत्याशी बनाया, जबकि जोधपुर में प्रसन्नचंद मेहता को मैदान में उतारा गया। कोटा में भाजपा ने आखिरी समय पर अनुसुईया गोस्वामी के नाम पर मुहर लगाई। वहीं कांग्रेस ने जयपुर में सुनीता मावर, जोधपुर में राजेंद्र सोलंकी और कोटा में सुनीता कुमारी को प्रत्याशी बनाया है।

जयपुर में सुनील कोठारी के नाम पर आखिरी वक्त में बनी सहमति

जयपुर नगर निगम में भाजपा ने 150 में से 78 वार्डों में जीत दर्ज की है। बहुमत के आंकड़े के लिहाज से पार्टी के पास मेयर चुनाव के लिए पर्याप्त संख्या है। इसके बावजूद प्रत्याशी के नाम को लेकर अंतिम समय तक मंथन चला।बताया गया कि भाजपा ने पार्षदों से तीन-तीन नाम लेकर उन्हें बाड़ेबंदी में भेजा था। इसके बाद मुख्यमंत्री आवास पर वरिष्ठ नेताओं के बीच चर्चा हुई। आखिरकार सुनील कोठारी के नाम पर सहमति बनी।नाम तय होने के बाद कोठारी को पुष्कर से जयपुर बुलाया गया। इसके बाद पार्टी ने उनके नाम की औपचारिक घोषणा की।

जैन समाज से लगातार तीसरे बड़े शहर में नाम आने पर हुई चर्चा

सुनील कोठारी के नाम पर चर्चा के दौरान भाजपा के भीतर यह सवाल भी उठा कि उदयपुर और जोधपुर के बाद जयपुर में भी जैन समाज से ही मेयर प्रत्याशी बनाया जाए या नहीं।उदयपुर में भाजपा ने पारस सिंघवी को प्रत्याशी बनाया है, जबकि जोधपुर में प्रसन्नचंद मेहता का नाम पहले सामने आ चुका था। ऐसे में जयपुर में सुनील कोठारी के नाम पर अंतिम फैसला होने से पहले सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर भी चर्चा हुई।पार्टी के भीतर 2014 के उदाहरण का भी जिक्र किया गया। उस समय जयपुर में निर्मल नाहटा और उदयपुर में चंद्रसिंह कोठारी मेयर रहे थे। दोनों जैन समाज से आते थे।

कोठारी की संगठन में भूमिका भी बनी अहम

सुनील कोठारी को भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाला चेहरा माना जाता रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह पिछले कुछ समय से संगठन और सरकार के बीच समन्वय से जुड़े काम देख रहे थे।पार्टी के एक पूर्व प्रदेशाध्यक्ष की भूमिका को भी कोठारी के राजनीतिक सफर से जोड़कर देखा जा रहा है। बताया जाता है कि टिकट से लेकर मेयर प्रत्याशी बनाए जाने तक उनके नाम को आगे बढ़ाने में इस नेता की भूमिका रही।हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। इसलिए संगठन के भीतर की भूमिका से जुड़े दावों को राजनीतिक सूत्रों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

कांग्रेस ने जयपुर में तीन नामों से भरे फॉर्म

कांग्रेस ने जयपुर मेयर चुनाव के लिए तीन नामों से नामांकन फॉर्म भरवाए। इनमें सुनीता मावर, सुनीता मेठी और दशरथ अटल के नाम शामिल हैं।पार्टी की ओर से सुनीता मावर को अधिकृत प्रत्याशी बताया गया है। ऐसे में बाकी नामों से दाखिल किए गए फॉर्म की स्थिति स्क्रूटनी के दौरान स्पष्ट होगी।भाजपा के पास बहुमत होने के कारण जयपुर में मेयर चुनाव का गणित फिलहाल उसके पक्ष में दिखाई देता है। हालांकि, औपचारिक चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम परिणाम सामने आएगा।

जोधपुर में भाजपा ने प्रसन्नचंद मेहता पर जताया भरोसा

जोधपुर नगर निगम में भाजपा ने प्रसन्नचंद मेहता को मेयर पद का प्रत्याशी बनाया है। मेहता को निकाय चुनाव के दौरान जयपुर से जोधपुर लाकर चुनाव मैदान में उतारा गया था।बताया गया कि उन्हें पहले जयपुर निकाय चुनाव का प्रभारी बनाया गया था। बाद में पार्टी ने उन्हें जोधपुर से पार्षद का चुनाव लड़ाया। मेयर पद के लिए मेघराज लोहिया और कमलेश पुरोहित के नाम भी चर्चा में थे।बाड़ेबंदी के दौरान पार्षदों के साथ बैठक के बाद प्रसन्नचंद मेहता के नाम पर सहमति बनने की जानकारी सामने आई।

कांग्रेस ने ऐन वक्त पर राजेंद्र सोलंकी को उतारा

जोधपुर में कांग्रेस ने नामांकन से करीब ढाई घंटे पहले राजेंद्र सोलंकी के नाम का ऐलान किया। सोलंकी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं।वह पहले जेडीए और यूआईटी के चेयरमैन रह चुके हैं। गहलोत सरकार के दौरान उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा भी मिला था। खास बात यह है कि उन्होंने नगर निगम चुनाव में पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा था।कांग्रेस ने उन्हें मेयर पद के लिए उतारकर पार्टी के भीतर के समीकरणों को साधने की कोशिश की है। हालांकि, इस रणनीति का असर चुनाव में कितना होगा, यह मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा।

निर्दलीय पार्षदों पर दोनों दलों की नजर

जोधपुर में मेयर चुनाव का गणित निर्दलीय पार्षदों के कारण भी महत्वपूर्ण हो गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सात निर्दलीय पार्षदों ने भाजपा को समर्थन दिया है।कांग्रेस इन पार्षदों में से कुछ को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इनमें कुछ पार्षद कांग्रेस विचारधारा से जुड़े रहे हैं।इसी राजनीतिक समीकरण के बीच कांग्रेस ने राजेंद्र सोलंकी को मैदान में उतारा है। पार्टी की कोशिश अपने बागी और निर्दलीय पार्षदों को भी साथ लाने की बताई जा रही है।

कोटा में आखिरी 40 मिनट में तय हुआ भाजपा प्रत्याशी

कोटा नगर निगम में मेयर पद के लिए भाजपा ने अनुसुईया गोस्वामी को प्रत्याशी बनाया है। यहां नाम को लेकर सबसे ज्यादा आखिरी समय तक असमंजस बना रहा।बताया गया कि नामांकन प्रक्रिया खत्म होने में करीब 40 मिनट बाकी थे, तभी अनुसुईया गोस्वामी के नाम से दो सेट नामांकन प्रस्तावकों के जरिए जमा कराए गए।इससे पहले भाजपा में सीमा चौधरी और प्रतिभा सुमन समेत कई नाम चर्चा में थे। अंतिम समय में अनुसुईया गोस्वामी के नाम पर सहमति बनी।

कोटा में पार्षदों को चित्तौड़गढ़ ले जाने की चर्चा

भाजपा में सहमति बनाने के लिए अलग-अलग खेमों से जुड़े पार्षदों को एक साथ चित्तौड़गढ़ ले जाने की जानकारी सामने आई है।बाड़ेबंदी के दौरान भाजपा पार्षदों के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने बैठकें कीं। कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा, लाडपुरा विधायक कल्पना देवी और शहर जिला अध्यक्ष राकेश जैन की मौजूदगी भी बताई गई।इस पूरी कवायद के बाद अंतिम समय में अनुसुईया गोस्वामी के नाम पर मुहर लगी और उनके नामांकन के दो सेट दाखिल किए गए।

कांग्रेस ने कोटा में सुनीता कुमारी को बनाया प्रत्याशी

कोटा में कांग्रेस ने सुनीता कुमारी को मेयर पद का प्रत्याशी बनाया है। भाजपा की तरह कांग्रेस में भी मेयर पद के लिए नाम को लेकर चर्चा चलती रही।नामांकन की अंतिम प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों दलों के प्रत्याशियों की तस्वीर साफ हो गई है। अब चुनाव में पार्षदों के समर्थन का गणित निर्णायक होगा।

तीनों शहरों में बोर्ड गठन के बाद मेयर चुनाव पर नजर

जयपुर, जोधपुर और कोटा में नगर निगम चुनाव के परिणाम आने के बाद अब मेयर चुनाव सबसे अहम चरण है। भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए बाड़ेबंदी कर रही हैं।जयपुर में भाजपा के पास बहुमत है, जबकि जोधपुर और कोटा में राजनीतिक समीकरणों पर सभी की नजर है। निर्दलीय और बागी पार्षदों की भूमिका भी कुछ जगह महत्वपूर्ण हो सकती है।अब नामांकन की स्क्रूटनी और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि किस शहर में मेयर पद का चुनाव निर्विरोध होता है और कहां मुकाबला देखने को मिलता है।

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Stv News Rajasthan

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