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इजरायल चुनाव विवाद: नेतन्याहू ने लगाया ‘वोट चोरी’ का आरोप, पुलिस ने कहा- धांधली के सबूत नहीं

इजरायल में आम चुनाव के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने चुनाव में धांधली और विदेशी हस्तक्षेप के आरोप लगाए हैं। नेतन्याहू ने दावा किया कि अरब पार्टियों ने कथित तौर पर वोट खरीदकर चुनाव परिणाम प्रभावित करने की कोशिश की। हालांकि, इजरायली पुलिस ने व्यापक चुनावी धांधली के आरोपों के समर्थन में कोई जांच या खुफिया सबूत नहीं मिलने की बात कही है। वहीं, केंद्रीय चुनाव समिति के प्रमुख ने विदेशी हस्तक्षेप की आशंकाओं की अलग से जांच कराने के लिए सुरक्षा एजेंसी शिन बेट को कहा है। इस बीच, राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गवीर ने अरब पार्टियों के नेताओं की गिरफ्तारी की मांग की है।

नेतन्याहू बोले- ‘इजरायल में चुनाव चोरी कर लिए गए’

इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को हुए संसदीय चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है। शुरुआती नतीजों में नेतन्याहू के समर्थन वाले गुट को बहुमत से कम सीटें मिलने का अनुमान सामने आया। इसी बीच लिकुड पार्टी ने चुनाव में कथित धांधली का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की।नेतन्याहू ने पार्टी के संदेश में कथित विदेशी हस्तक्षेप और अरब पार्टियों के पक्ष में वोटरों को रिश्वत दिए जाने के आरोप लगाए। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया। उनका दावा था कि इस कथित गतिविधि का उद्देश्य इजरायल की संसद पर विदेशी ताकतों का प्रभाव बढ़ाना और दक्षिणपंथी सरकार को सत्ता से दूर करना था। ये आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पुलिस ने कहा- व्यापक चुनावी धांधली के सबूत नहीं

नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान रिश्वत, धमकी, हिंसा, जाली दस्तावेज और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया। पार्टी ने दावा किया कि उसने पुलिस, शिन बेट और केंद्रीय चुनाव समिति को सैकड़ों गवाहियां और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई है।हालांकि, 29 अक्टूबर को इजरायली पुलिस ने इन आरोपों पर अलग रुख रखा। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मतदान के दौरान चुनावी निष्पक्षता से जुड़ी असामान्य घटनाएं अपेक्षाकृत कम थीं। पुलिस ने कहा कि व्यापक धांधली के दावों के समर्थन में जांच या खुफिया जानकारी से जुड़े सबूत नहीं मिले हैं।

विदेशी हस्तक्षेप की आशंका पर शिन बेट से जांच

इस विवाद के बीच इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति के प्रमुख और न्यायमूर्ति नोआम सोलबर्ग ने विदेशी हस्तक्षेप की आशंकाओं की जांच के लिए शिन बेट को निर्देश दिए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, चिंता विदेशी संस्थाओं की ओर से कथित फंडिंग के जरिए चुनाव को प्रभावित करने की संभावना को लेकर है।हालांकि, विदेशी हस्तक्षेप की आशंका और मतदान केंद्रों पर व्यापक धांधली के आरोप अलग-अलग मुद्दे हैं। चुनाव समिति प्रमुख ने जांच की जरूरत बताई है, लेकिन आशंकाओं की पुष्टि नहीं की है। इसलिए इस जांच को चुनाव चोरी के आरोपों का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

बेन गवीर ने अरब पार्टियों के नेताओं की गिरफ्तारी की मांग की

इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गवीर ने भी विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने शिन बेट से उन अरब पार्टी नेताओं को गिरफ्तार करने की मांग की, जिन पर कथित तौर पर कतर से जुड़े धन के इस्तेमाल का संदेह जताया गया है।ये आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। संबंधित अरब पार्टियों की ओर से भी आरोपों को लेकर विरोध जताया गया है। ऐसे में गिरफ्तारी की मांग और किसी अपराध में वास्तविक संलिप्तता के बीच अंतर करना जरूरी है। किसी राजनीतिक दल या नेता के खिलाफ आरोप लगना अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।

अरब पार्टियों को मिली सीटों से बढ़ा राजनीतिक महत्व

चुनाव के शुरुआती नतीजों में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों के लिए 19 सीटें मिलने का अनुमान सामने आया। यह संख्या इजरायल की 120 सदस्यीय संसद नेसेट में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बना सकती है। वहीं, नेतन्याहू के समर्थन वाले गुट को करीब 53 सीटें और विपक्षी दलों को करीब 48 सीटें मिलने का अनुमान बताया गया। अंतिम परिणाम और गठबंधन की स्थिति सरकार गठन की दिशा तय करेंगे।ऐसे समीकरणों में अरब पार्टियों की भूमिका सरकार बनाने के लिए समर्थन जुटाने की प्रक्रिया में अहम हो सकती है। हालांकि, किसी गठबंधन की संभावना या सरकार गठन का अंतिम नतीजा अभी तय नहीं है।

चुनाव विवाद का अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही

इजरायल में चुनावी धांधली के आरोप, विदेशी हस्तक्षेप की आशंका और अरब पार्टियों की संभावित राजनीतिक भूमिका अब बहस के केंद्र में हैं। नेतन्याहू और उनकी पार्टी ने जांच की मांग की है, जबकि पुलिस ने व्यापक धांधली के दावों के समर्थन में सबूत नहीं मिलने की बात कही है।अब शिन बेट की जांच और चुनाव समिति की समीक्षा से जुड़े निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। जब तक आधिकारिक जांच में आरोप साबित नहीं होते, तब तक चुनाव चोरी या किसी पार्टी की आपराधिक संलिप्तता को स्थापित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

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Stv News Rajasthan

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