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ईरान की महिलाओं की बेखौफ आवाज: 74 कोड़े भी न रोक सके, सतà¥à¤¤à¤¾ डर गई


🟦 डर को तोड़कर आगे बढ़ीं महिलाà¤à¤‚

ईरान के हर बड़े आंदोलन के पीछे महिलाà¤à¤‚ रही हैं। जिन महिलाओं ने सबसे पहले डर को चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ दी, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सबसे पहले कà¥à¤šà¤²à¤¾ गया—कà¥à¤› को गोली लगी, कà¥à¤› को फांसी दी गई, और कई आज भी जेलों में हैं। इन महिलाओं की कहानियां शोर नहीं करतीं, लेकिन उनके साहस ने आज की ईरानी लड़कियों में हिमà¥à¤®à¤¤ जगाई है।


🟦 फोरूघ फरà¥à¤°à¥à¤–जाद: कविता और सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ इचà¥à¤›à¤¾ की आवाज़

फोरूघ सिरà¥à¤« कवयितà¥à¤°à¥€ नहीं थीं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने 1950–60 के दशक में खà¥à¤²à¥‡ शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ इचà¥à¤›à¤¾, पà¥à¤°à¥‡à¤® और अकेलेपन की बात की। उनका लिखा हà¥à¤†â€”“मैं पाप करती हूà¤, और पाप करते हà¥à¤ जीना चाहती हूà¤â€â€”पà¥à¤°à¥à¤· सतà¥à¤¤à¤¾ और धारà¥à¤®à¤¿à¤• नैतिकता के लिठचà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ था। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ चरितà¥à¤°à¤¹à¥€à¤¨ कहा गया, सामाजिक बहिषà¥à¤•ार à¤à¥‡à¤²à¤¨à¤¾ पड़ा और सरकारी निगरानी में रहीं। 1967 में रहसà¥à¤¯à¤®à¤¯à¥€ सड़क हादसे में उनकी मौत हà¥à¤ˆà¥¤ आज भी उनकी कविताà¤à¤‚ ईरानी लड़कियों के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ का सà¥à¤°à¥‹à¤¤ हैं।


🟦 अशरफ देहकानी: हथियार और जेल से आज़ादी

अशरफ वामपंथी कà¥à¤°à¤¾à¤‚तिकारी थीं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने भूमिगत संगठन बनाठऔर हथियार उठाà¤à¥¤ गिरफà¥à¤¤à¤¾à¤° होकर यातनाà¤à¤‚ à¤à¥‡à¤²à¥€à¤‚—बिजली के à¤à¤Ÿà¤•े, नाखून उखाड़ना, महीनों अंधेरी कोठरी। फिर भी उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने जेल तोड़कर भाग निकली और पूरे ईरान में कà¥à¤°à¤¾à¤‚ति की अलख जगाई। शाह का शासन खतà¥à¤® हà¥à¤†, लेकिन इसà¥à¤²à¤¾à¤®à¥€ गणराजà¥à¤¯ ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ फिर दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ घोषित किया। अशरफ निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ में हैं, लेकिन उनकी कहानी आज भी ईरानी महिलाओं को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करती है।


🟦 शिरिन आलमहोली: माफी नहीं मांगी, फांसी सà¥à¤µà¥€à¤•ार की

शिरिन कà¥à¤°à¥à¤¦ महिला थीं। 2010 में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ देशविरोधी गतिविधियों के आरोप में फांसी दी गई। सिरà¥à¤« 28 साल की उमà¥à¤° में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने जेल में वकील नहीं पाया और माफी लेने से इंकार किया। उनकी फांसी के बाद परिवार को कबà¥à¤° तक नहीं बताया गया। आज कà¥à¤°à¥à¤¦ महिलाà¤à¤‚ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ साहस का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• मानती हैं।


🟦 निदा आगा सोलà¥à¤¤à¤¾à¤¨: मौत जो कैमरे में कैद हो गई

2009 के गà¥à¤°à¥€à¤¨ मूवमेंट के दौरान निदा सड़क पर वोट की चोरी के विरोध में खड़ी थीं। गोली लगने के बाद उनकी मौत कैमरे में कैद हो गई। परिवार को चà¥à¤ª रहने की धमकी दी गई, लेकिन उनका वीडियो ईरान की अंतरातà¥à¤®à¤¾ बन गया।


🟦 नसरीन सोतूदे: जेल में भी जिंदा पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§

नसरीन मानवाधिकार वकील हैं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने हिजाब कानून के खिलाफ खड़ी महिलाओं का केस लड़ा और बदले में 38 साल की सजा पाई, कोड़े भी मारे गà¤à¥¤ जेल में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने भूख हड़ताल की और समà¤à¥Œà¤¤à¤¾ नहीं किया। आज भी वह ईरानी जेल और अदालतों के लिठडर का नाम हैं।


🟦 रोया हशमती: 74 कोड़े, फिर भी न डरीं

2024 में नैतिकता उलà¥à¤²à¤‚घन के आरोप में रोया हशमती को 74 कोड़े मारे गà¤à¥¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने हिजाब पहनने से इंकार किया और कोरà¥à¤Ÿ में सिर उठाकर चलीं। सोशल मीडिया पर उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी आपबीती साà¤à¤¾ करते हà¥à¤ लिखा कि सजा के वकà¥à¤¤ वे “आजादी के गीत गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¾ रही थीं।â€


🟦 महसा अमीनी: मौत जिसने डर खतà¥à¤® कर दिया

2022 में मोरल पà¥à¤²à¤¿à¤¸ की हिरासत में महसा अमीनी की मौत ने पूरे ईरान को हिला दिया। उनकी मौत के बाद महिलाओं ने सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• रूप से बाल काटे, सड़कों पर उतरीं और विरोध जताया। कई विरोध करने वाली महिलाà¤à¤‚ लापता हैं या सरेआम फांसी दी गई। लेकिन उनका साहस ईरानी महिलाओं में डर को हमेशा के लिठखतà¥à¤® कर गया।


🟦 साहस ने बनाई आज़ादी की राह

ईरानी महिलाओं की ये कहानियां सिरà¥à¤« पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§ की नहीं हैं। ये दिखाती हैं कि डर को चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ देना और आवाज उठाना सतà¥à¤¤à¤¾ के लिठसबसे बड़ा खतरा है। 74 कोड़े, फांसी, जेल—कà¥à¤› भी उनका साहस नहीं रोक पाया।

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