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सिंधु जल संधि पर अनिश्चितता से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बढ़ी चिंता, कृषि और पर्यटन दोनों पर असर की आशंका

भारत द्वारा अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को स्थगित करने के फैसले के बाद पाकिस्तान में जल संसाधनों को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है। कृषि के साथ-साथ अब पर्यटन क्षेत्र पर भी संभावित प्रभाव को लेकर आशंकाएं जताई जा रही हैं। पाकिस्तानी विशेषज्ञों और पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि जल प्रवाह और जल प्रबंधन को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, तो इसका असर स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और आजीविका पर पड़ सकता है।

कृषि के साथ पर्यटन क्षेत्र में भी बढ़ी चिंता

सिंधु जल संधि को लेकर जारी अनिश्चितता का असर अब पाकिस्तान के पर्यटन उद्योग तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा (KP) और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के वे इलाके, जहां नदियां, झीलें और जलाशय पर्यटन की प्रमुख पहचान हैं, वहां पर्यटन कारोबार से जुड़े लोग भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इन क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था काफी हद तक प्राकृतिक जल स्रोतों पर आधारित है। ऐसे में यदि जल प्रवाह प्रभावित होता है, तो होटल, एडवेंचर टूरिज्म और स्थानीय कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर है स्थानीय आजीविका

खैबर पख्तूनख्वा के कई पर्यटन स्थल, जैसे सैफुल मलूक झील, आंसू झील और खानपुर बांध, हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन क्षेत्रों में हजारों परिवारों की आजीविका सीधे पर्यटन गतिविधियों से जुड़ी हुई है। उनका मानना है कि यदि नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में लंबे समय तक बदलाव आता है, तो इसका असर पर्यावरण के साथ-साथ स्थानीय रोजगार पर भी पड़ सकता है। हालांकि वर्तमान में इस संबंध में किसी व्यापक प्रभाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

भारत ने जल प्रबंधन पर दोहराया अपना रुख

भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि राष्ट्रीय हितों के अनुरूप जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में काम किया जा रहा है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने हाल ही में कहा कि पाकिस्तान को जाने वाले पानी के प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक योजना पर कार्य चल रहा है। सरकार का लक्ष्य उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है। भारत ने यह रुख अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने के फैसले के बाद अपनाया था।

विशेषज्ञों ने विश्व बैंक की भूमिका पर जताई उम्मीद

पाकिस्तान के कुछ कानूनी और जल विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधु जल संधि विश्व बैंक की मध्यस्थता में 1960 में अस्तित्व में आई थी, इसलिए इस विवाद के समाधान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत की आवश्यकता पड़ सकती है। पाकिस्तानी विशेषज्ञों का कहना है कि जल प्रबंधन को लेकर अनिश्चितता का असर कृषि, पनबिजली, पेयजल आपूर्ति और पर्यटन जैसे कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है। हालांकि इस मुद्दे पर भारत की ओर से कोई नया आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है कि वह संधि को बहाल करने पर विचार कर रहा है।

जल विवाद का असर क्षेत्रीय संबंधों पर भी नजर

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि लंबे समय तक दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार रही है। वर्तमान परिस्थितियों में यह मुद्दा केवल जल संसाधनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कूटनीतिक और रणनीतिक महत्व भी हासिल कर चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस विषय पर होने वाली किसी भी बातचीत का प्रभाव दोनों देशों के संबंधों के साथ-साथ दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ सकता है।

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