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होर्मुज के पास मौजूद 9 भारतीय जहाज फंसे नहीं, व्यापारिक गतिविधियों में व्यस्त; सरकार ने दी स्थिति स्पष्ट

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चल रही अटकलों के बीच भारत सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, पश्चिमी होर्मुज क्षेत्र में मौजूद 9 भारतीय जहाज किसी संकट में नहीं फंसे हैं, बल्कि वे सामान्य व्यापारिक गतिविधियों में लगे हुए हैं। सरकार लगातार पूरे क्षेत्र पर नजर बनाए हुए है और भारतीय जहाजों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

भारतीय जहाजों के फंसे होने की खबरों का किया गया खंडन

हाल के दिनों में ऐसी खबरें सामने आ रही थीं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास भारतीय जहाज फंस गए हैं। हालांकि जहाजरानी मंत्रालय के अधिकारियों ने इन दावों को गलत बताते हुए कहा कि पश्चिमी होर्मुज क्षेत्र में मौजूद सभी 9 भारतीय जहाज सुरक्षित हैं। अधिकारी के मुताबिक ये जहाज अपने निर्धारित व्यापारिक कार्यों में लगे हैं और किसी आपात स्थिति का सामना नहीं कर रहे हैं। सरकार स्थिति की लगातार निगरानी कर रही है ताकि किसी भी संभावित जोखिम से समय रहते निपटा जा सके।

संघर्ष के बाद 50 जहाज सुरक्षित पार कर चुके हैं जलडमरूमध्य

अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद अब तक भारत से जुड़े कुल 50 भारतीय और विदेशी झंडे वाले जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित पार कर चुके हैं। इनमें 18 भारतीय जहाज और 32 विदेशी ध्वज वाले पोत शामिल हैं। यह आंकड़ा बताता है कि सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद समुद्री व्यापार पूरी तरह रुका नहीं है और आवश्यक निगरानी के साथ जहाजों का आवागमन जारी है।

बल्क कैरियर और ऊर्जा परिवहन वाले जहाजों की रही प्रमुख हिस्सेदारी

जलडमरूमध्य पार करने वाले जहाजों में सबसे अधिक 19 बल्क कैरियर शामिल रहे। इसके अलावा 14 जहाज एलपीजी (LPG) लेकर जा रहे थे, जबकि 12 कच्चे तेल के टैंकर थे। दो एलएनजी (LNG) कैरियर और एक कंटेनर जहाज ने भी सुरक्षित रूप से यह मार्ग पार किया। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में तनाव कम होने के बाद शिपिंग कंपनियां अपने परिचालन को पूरी तरह सामान्य करने का निर्णय लेंगी।

शिपिंग कंपनियां हालात पर रख रही हैं नजर

समुद्री कारोबार से जुड़े जानकारों का कहना है कि कंपनियां फिलहाल क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति का लगातार आकलन कर रही हैं। हालांकि भारतीय जहाजों के फंसे होने जैसी कोई स्थिति नहीं है, फिर भी नए जहाजों को भेजने या मार्ग तय करने से पहले कंपनियां जोखिम का मूल्यांकन कर रही हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि व्यापारिक गतिविधियां सुरक्षित और बिना बाधा के जारी रहें।

कामराजर बंदरगाह ने हासिल की नई उपलब्धि

इस बीच भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे को लेकर भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। तमिलनाडु का कामराजर बंदरगाह 18 मीटर ऑपरेशनल ड्राफ्ट की सुविधा वाला केंद्र सरकार के स्वामित्व वाला दूसरा प्रमुख बंदरगाह बन गया है। इससे पहले यह क्षमता केवल विशाखापत्तनम बंदरगाह के पास थी। केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इसे भारत के समुद्री क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में अहम कदम बताया। उनके अनुसार यह उपलब्धि बड़े जहाजों के संचालन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नई गति देने में मदद करेगी।

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