#देश दुनिया

भारत-पाकिस्तान के बीच कोलंबो में बैकचैनल संपर्क की चर्चा, ट्रैक-1.5 बैठक पर बढ़ी हलचल

भारत और पाकिस्तान के बीच औपचारिक वार्ता भले ही लंबे समय से ठप हो, लेकिन श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में हुई कथित ‘ट्रैक-1.5’ बैठक ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक में दोनों देशों के पूर्व राजनयिकों, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। हालांकि, भारत या पाकिस्तान की ओर से इस बैठक की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

कोलंबो में हुई कथित ट्रैक-1.5 वार्ता

पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलंबो में आयोजित इस अनौपचारिक संवाद में भारत और पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी तथा राजनीतिक प्रतिनिधि शामिल हुए। रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि और पाकिस्तान के सत्तारूढ़ गठबंधन से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने भी बैठक में भाग लिया। हालांकि, सुरक्षा और गोपनीयता का हवाला देते हुए प्रतिभागियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए।

पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भी रखा अपना पक्ष

रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक में भारत के एक पूर्व सेना प्रमुख और पाकिस्तान के एक सेवानिवृत्त टू-स्टार सैन्य अधिकारी भी मौजूद थे। बताया गया कि दोनों अधिकारी पहले भी बैकचैनल संवाद और द्विपक्षीय विश्वास बहाली से जुड़े प्रयासों में भूमिका निभा चुके हैं। ऐसे मंचों का उद्देश्य आधिकारिक वार्ता से पहले संवाद का माहौल तैयार करना माना जाता है।

आतंकवाद, जल विवाद और संकट प्रबंधन पर हुई चर्चा

सूत्रों के हवाले से कहा गया कि बैठक में आतंकवाद, जल संसाधनों से जुड़े मुद्दों और दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के उपायों पर विचार-विमर्श हुआ। प्रतिभागियों ने संकट की स्थिति में संवाद तंत्र को मजबूत बनाने और भविष्य में औपचारिक ‘ट्रैक-1’ वार्ता का रास्ता तैयार करने पर भी चर्चा की। ट्रैक-1 वार्ता का अर्थ दोनों देशों की सरकारों के बीच आधिकारिक बातचीत से होता है।

भारत सरकार की ओर से नहीं आई कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि भारतीय प्रतिनिधियों ने भविष्य में औपचारिक वार्ता की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किया, लेकिन मौजूदा समय में भारत सरकार पाकिस्तान के साथ प्रत्यक्ष सरकारी स्तर की बातचीत शुरू करने के पक्ष में नहीं दिख रही है। फिलहाल नई दिल्ली और इस्लामाबाद, दोनों में से किसी भी सरकार ने इस कथित बैठक की पुष्टि या खंडन नहीं किया है।

अनौपचारिक संवाद क्यों माना जाता है अहम?

विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रैक-1.5 और ट्रैक-2 जैसे संवाद ऐसे समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जब आधिकारिक वार्ता रुकी हुई हो। इन मंचों के जरिए दोनों देशों के पूर्व अधिकारी और नीति विशेषज्ञ संवेदनशील मुद्दों पर विचार साझा करते हैं, जिससे भविष्य में कूटनीतिक बातचीत की संभावनाएं बनाई जा सकती हैं। हालांकि, जब तक दोनों सरकारों की आधिकारिक सहमति नहीं होती, ऐसे संवादों को औपचारिक नीति परिवर्तन का संकेत नहीं माना जाता।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *