India-Israel Defense Alliance: ईरान के खिलाफ नए सैन्य गठबंधन का प्रस्ताव, क्या भारत देगा साथ?
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल ने भारत, अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ मिलकर एक नए रणनीतिक सुरक्षा गठबंधन का प्रस्ताव रखा है। इजरायली रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक अमीर बारम ने कहा कि ईरान की बढ़ती सैन्य क्षमताओं से निपटने के लिए क्षेत्रीय सहयोग अब पहले से अधिक जरूरी हो गया है। हालांकि, भारत की पारंपरिक रणनीतिक स्वायत्तता को देखते हुए यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या नई दिल्ली ऐसे किसी सैन्य ढांचे का हिस्सा बनेगी।
ईरान को लेकर इजरायल ने रखा बड़ा प्रस्ताव
इजरायल ने भारत, अमेरिका और यूरोप तक फैले एक व्यापक सुरक्षा गठबंधन की वकालत की है। इजरायली रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक अमीर बारम ने तेल अवीव में आयोजित हर्जलिया कॉन्फ्रेंस में कहा कि हालिया संघर्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान की सैन्य शक्ति पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। उनके अनुसार, अब साझा सुरक्षा हितों के आधार पर एक मजबूत क्षेत्रीय गठबंधन की आवश्यकता है।
अमेरिका के साथ नए रक्षा ढांचे पर भी जोर
अमीर बारम ने कहा कि इजरायल को अपनी सुरक्षा रणनीति को नए दौर के अनुरूप तैयार करना होगा। इसके लिए अमेरिका के साथ मजबूत रक्षा समझौते और समान सोच वाले देशों के साथ दीर्घकालिक सहयोग जरूरी है। उनका मानना है कि साझा हितों और रणनीतिक साझेदारी पर आधारित नया सुरक्षा ढांचा भविष्य की चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभा सकता है।
भारत से यूरोप तक सुरक्षा गलियारे की सोच
बारम का प्रस्ताव भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) की अवधारणा से भी जुड़ा माना जा रहा है। वर्ष 2023 में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित इस परियोजना का उद्देश्य भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच व्यापार एवं कनेक्टिविटी बढ़ाना है। अब इजरायल इसी भौगोलिक क्षेत्र को रणनीतिक सुरक्षा सहयोग के नजरिए से भी महत्वपूर्ण मान रहा है।
ईरान को बताया सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा
इजरायली अधिकारी ने कहा कि ईरान लंबे समय से इजरायल की सुरक्षा और अस्तित्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। उनके मुताबिक, हालिया सैन्य घटनाओं ने यह दिखा दिया कि ईरान की सैन्य क्षमताओं का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। उन्होंने इसे अमेरिका और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए भी चिंता का विषय बताया।
क्या भारत ऐसे गठबंधन में शामिल होगा?
भारत लंबे समय से ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) की नीति अपनाता रहा है। नई दिल्ली अमेरिका, इजरायल और पश्चिमी देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ स्वतंत्र विदेश नीति पर भी जोर देती है। इसलिए किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन में शामिल होने का फैसला भारत के लिए केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि कूटनीतिक और भू-राजनीतिक संतुलन का भी विषय होगा। फिलहाल भारत सरकार की ओर से इजरायल के इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भारत-इजरायल रक्षा संबंध लगातार मजबूत
पिछले कुछ वर्षों में भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ा है। मिसाइल प्रणाली, ड्रोन, निगरानी तकनीक, साइबर सुरक्षा और रक्षा अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में रणनीतिक सहयोग और गहरा हो सकता है, लेकिन किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन पर भारत का रुख उसकी स्वतंत्र विदेश नीति को ध्यान में रखकर ही तय होगा।