19 साल बाद भारत-EU FTA पर बड़ी खुशखबरी, साल के अंत तक समझौते की उम्मीद
करीब 19 वर्षों से लंबित भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने संकेत दिया है कि इस साल के अंत तक समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। यह डील भारत के निर्यात, निवेश और वैश्विक व्यापारिक स्थिति को नई मजबूती दे सकती है।
भारत-EU व्यापार समझौता अंतिम दौर में
करीब दो दशकों से चली आ रही भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने उम्मीद जताई है कि वर्ष 2026 के अंत तक इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। यदि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी होती हैं, तो यह समझौता 2027 की शुरुआत से लागू हो सकता है। इसे भारत और यूरोप के आर्थिक संबंधों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया अंतिम चरण में
एक साक्षात्कार में हर्वे डेल्फिन ने बताया कि दोनों पक्ष कानूनी समीक्षा और तकनीकी दस्तावेजों को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। हालांकि वर्ष के अंत में होने वाले अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों और व्यस्त कूटनीतिक कैलेंडर के कारण हस्ताक्षर की तारीख में बदलाव संभव है। इसके बावजूद दोनों पक्ष इस समझौते को औपचारिक रूप देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
भारत और यूरोप बने स्वाभाविक रणनीतिक साझेदार
राजदूत के अनुसार, भारत और यूरोपीय संघ अब एक-दूसरे को स्वाभाविक आर्थिक और रणनीतिक साझेदार के रूप में देखते हैं। दोनों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं और नियम-आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था का समर्थन करती हैं। ऐसे समय में जब दुनिया भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना कर रही है, यह साझेदारी स्थिरता और भरोसे का नया आधार बन सकती है।
वैश्विक संकटों ने बढ़ाई साझेदारी की अहमियत
कोविड-19 महामारी, पश्चिम एशिया के संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितता ने देशों को नए और भरोसेमंद साझेदार तलाशने के लिए प्रेरित किया है। यूरोपीय संघ का मानना है कि भारत के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध दोनों पक्षों को आपूर्ति श्रृंखला, निवेश और आर्थिक विकास के नए अवसर प्रदान करेंगे।
भारत को क्या होगा फायदा?
FTA लागू होने के बाद भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलने की संभावना है। इससे वस्त्र, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, आईटी और कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही यूरोप से निवेश और आधुनिक तकनीक का प्रवाह भी तेज होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत को वैश्विक विनिर्माण और व्यापार केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
बदलते वैश्विक व्यापार समीकरणों में नई दिशा
भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह समझौता ऐसे समय में आगे बढ़ रहा है, जब वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। यदि यह डील तय समय पर लागू होती है, तो दोनों पक्षों के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे तथा वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका भी और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।