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भारत-कनाडा रिश्तों में नई शुरुआत? पीएम कार्नी की भारत यात्रा से बदल सकती है रणनीति


भारत और कनाडा के बीच पिछले कुछ समय से चले आ रहे तनाव के बाद अब रिश्तों में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney अपनी पहली प्रमुख विदेश यात्रा के तहत भारत आ रहे हैं, जहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री Narendra Modi से होगी। इस दौरे को दोनों देशों के संबंधों में “रीसेट मोमेंट” माना जा रहा है।


🌏 भारत बना कनाडा की नई रणनीति का केंद्र

कनाडा ने अपनी नई हिंद-प्रशांत नीति में भारत को केंद्रीय भूमिका दी है।
26 फरवरी से 7 मार्च तक होने वाली यात्रा में भारत पहला और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। ओटावा का लक्ष्य वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच व्यापार विविधीकरण, निवेश आकर्षण और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी मजबूत करना है।


🤝 मोदी-कार्नी मुलाकात क्यों अहम?

नई दिल्ली और मुंबई में होने वाली बैठकों में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है:

  • व्यापार और निवेश
  • स्वच्छ ऊर्जा सहयोग
  • टेक्नोलॉजी और AI
  • प्रतिभा व स्किल मोबिलिटी
  • रक्षा और रणनीतिक साझेदारी
  • सांस्कृतिक सहयोग

विश्लेषकों का मानना है कि मोदी-कार्नी की जोड़ी भविष्य में आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दे सकती है।


📈 व्यापार बढ़ाने का बड़ा लक्ष्य

भारत पहले से ही कनाडा का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
2024 में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 30.8 अरब डॉलर रहा। अब लक्ष्य है कि प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के जरिए 2030 तक व्यापार को बढ़ाकर 70 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए।


🏭 निवेश और सप्लाई चेन पर फोकस

कनाडा भारत को सिर्फ बाजार नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है।
वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव और बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच ओटावा भारत के साथ टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इकोनॉमी में सहयोग बढ़ाना चाहता है।


🌐 भारत के बाद ऑस्ट्रेलिया और जापान दौरा

भारत यात्रा के बाद कार्नी ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे, जहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री Anthony Albanese से होगी।
इसके बाद टोक्यो में जापान नेतृत्व के साथ स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा और उन्नत तकनीक सहयोग पर चर्चा होगी।
तीनों यात्राएं मिलकर कनाडा की नई हिंद-प्रशांत रणनीति की आधारशिला मानी जा रही हैं।


🧭क्यों बदल रहा है कनाडा का रुख?

विशेषज्ञ तीन बड़े कारण बताते हैं:

  • चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति
  • तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ जुड़ाव
  • इंडो-पैसिफिक में सुरक्षा और आर्थिक संतुलन

कनाडा अब भारत को भविष्य की आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा साझेदारी के रूप में देख रहा है।


🇮🇳 भारत के लिए क्या मायने?

यह दौरा संकेत देता है कि कनाडा पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर विश्वास बहाली चाहता है।
यदि वार्ता सफल रहती है तो व्यापार, टेक्नोलॉजी और रणनीतिक सहयोग में नया अध्याय शुरू हो सकता है।

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