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पाकिस्तान से तनाव के बीच अफगानिस्तान के मंत्री पहुंचे भारत, रणनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अफगानिस्तान के कृषि, सिंचाई एवं पशुपालन मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमारी का नई दिल्ली दौरा रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। भारत ने उनके आगमन का गर्मजोशी से स्वागत किया है। ऐसे समय में हुआ यह दौरा दोनों देशों के बीच मानवीय सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।

नई दिल्ली पहुंचने पर हुआ गर्मजोशी से स्वागत

अफगानिस्तान के कृषि, सिंचाई एवं पशुपालन मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमारी अचानक भारत के दौरे पर पहुंचे हैं। विदेश मंत्रालय ने उनके नई दिल्ली आगमन की पुष्टि करते हुए स्वागत की तस्वीर भी साझा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मंत्री के साथ आपसी हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सार्थक चर्चा की उम्मीद है। ऐसे समय में यह दौरा हुआ है, जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के संबंध बेहद तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। इसलिए इस यात्रा को केवल औपचारिक नहीं, बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव के बीच बढ़ा दौरे का महत्व

हाल के सप्ताहों में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव और आरोप-प्रत्यारोप लगातार बढ़े हैं। दोनों देशों के बीच सुरक्षा से जुड़े मुद्दों और सीमा पार गतिविधियों को लेकर कई बार टकराव की स्थिति बनी। ऐसे माहौल में अफगान मंत्री का भारत आना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि काबुल क्षेत्रीय स्तर पर अपने सहयोगी देशों के साथ संवाद को मजबूत करना चाहता है। भारत और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से विकास, मानवीय सहायता और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग रहा है, जिसे अब नई परिस्थितियों में और मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।

भारत लगातार बढ़ा रहा है मानवीय सहायता

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अफगानिस्तान के लोगों के लिए मानवीय सहायता का सिलसिला जारी रखा है। हाल ही में भारत ने पांच टन आवश्यक दवाइयों की खेप अफगानिस्तान भेजी थी। विदेश मंत्रालय ने इसे अफगान जनता के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया था। दवाओं के अलावा भारत खाद्यान्न, टीके और राहत सामग्री भी समय-समय पर उपलब्ध कराता रहा है। केंद्र सरकार ने हालिया बजट में भी अफगानिस्तान के लिए 150 करोड़ रुपये की सहायता का प्रावधान किया है, जिससे दोनों देशों के सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

आईएसआईएस को लेकर पाकिस्तान पर लगाए गए गंभीर आरोप

तालिबान प्रशासन ने हाल के दिनों में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और वहां की सैन्य व्यवस्था पर इस्लामिक स्टेट (ISIS) को संरक्षण देने के आरोप लगाए हैं। तालिबान का दावा है कि आईएसआईएस अफगानिस्तान की सुरक्षा और स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है तथा पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल संगठन की गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। हालांकि पाकिस्तान इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है। इस मुद्दे ने दोनों देशों के रिश्तों में और अधिक तनाव पैदा कर दिया है तथा क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं भी सामने आई हैं।

सीमा पार कार्रवाई के बाद बदले क्षेत्रीय समीकरण

रिपोर्टों के अनुसार, हाल के दिनों में अफगानिस्तान की ओर से पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के कुछ इलाकों में ड्रोन आधारित कार्रवाई की गई। अफगान रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि इन अभियानों का उद्देश्य आईएसआईएस और उससे जुड़े ठिकानों को निशाना बनाना था। इन घटनाओं के बाद दक्षिण एशिया में सुरक्षा हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में भारत और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता संवाद क्षेत्रीय स्थिरता, मानवीय सहयोग और कूटनीतिक संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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