IMEC में बड़े बदलाव की चर्चा, क्या सऊदी अरब इजरायल की जगह सीरिया को देगा अहम भूमिका?
भारत-यूरोप व्यापार को नई दिशा देने के उद्देश्य से शुरू की गई इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) परियोजना को लेकर नई अटकलें सामने आई हैं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सऊदी अरब कॉरिडोर के प्रस्तावित मार्ग में बदलाव पर विचार कर रहा है, जिसमें इजरायल के बजाय सीरिया को शामिल करने का विकल्प देखा जा रहा है। यदि ऐसा होता है, तो यह परियोजना से जुड़े सभी देशों के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है। हालांकि, इस बदलाव की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
क्या है पूरा मामला?
कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब पश्चिम एशिया के बदले हुए भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए IMEC के मार्ग की समीक्षा कर रहा है। रिपोर्टों में कहा गया है कि गाजा युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के बाद रियाद इजरायल से होकर गुजरने वाले प्रस्तावित कॉरिडोर के विकल्प तलाश रहा है। इसी क्रम में सीरिया के रास्ते रेलवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित करने की संभावना पर चर्चा होने की बात कही गई है। हालांकि, इस विषय पर सऊदी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
IMEC परियोजना क्यों है अहम?
IMEC की घोषणा सितंबर 2023 में नई दिल्ली में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी। इस परियोजना का उद्देश्य भारत को संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जॉर्डन, इजरायल और यूरोप से रेल, बंदरगाह और समुद्री मार्गों के जरिए जोड़ना है। इस कॉरिडोर को वैश्विक सप्लाई चेन मजबूत करने, व्यापारिक समय कम करने और भारत-यूरोप आर्थिक संपर्क बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना गया था।
सीरिया का विकल्प क्यों चर्चा में है?
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यदि इजरायल को मार्ग से बाहर रखा जाता है, तो सऊदी अरब खाड़ी क्षेत्र से भूमध्य सागर तक सीरिया के रास्ते एक वैकल्पिक रेल संपर्क विकसित करने पर विचार कर सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे इजरायल की संभावित लॉजिस्टिक भूमिका कम हो सकती है। हालांकि, यह केवल मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी है तथा परियोजना के अंतिम स्वरूप को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है।
भारत के लिए क्या हो सकते हैं संभावित असर?
भारत ने IMEC को यूरोप और पश्चिम एशिया तक व्यापारिक पहुंच बढ़ाने के एक बड़े अवसर के रूप में देखा है। यदि परियोजना के मूल मार्ग में बड़े बदलाव होते हैं, तो इससे भारत की लॉजिस्टिक्स रणनीति और निवेश योजनाओं पर असर पड़ सकता है। विशेष रूप से इजरायल के हाइफा बंदरगाह में किए गए निवेश और मौजूदा प्रस्तावित नेटवर्क की उपयोगिता पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है। वहीं, सीरिया की सुरक्षा स्थिति और राजनीतिक परिस्थितियां भी किसी भी संभावित बदलाव को जटिल बना सकती हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल IMEC के मार्ग में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। परियोजना में शामिल देशों के बीच भविष्य की बातचीत और क्षेत्रीय राजनीतिक हालात इस कॉरिडोर की दिशा तय करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी भी प्रकार का बदलाव होता है, तो उसे सभी साझेदार देशों की सहमति और व्यापक रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए ही लागू किया जाएगा।