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रूस सीमा के पास परमाणु क्षमता बढ़ाएगा फिनलैंड? F-35 तैनाती की तैयारी से बढ़ी हलचल

फिनलैंड ने अपनी धरती पर परमाणु हथियारों से जुड़े दशकों पुराने प्रतिबंध को हटाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नाटो में शामिल होने के बाद देश की सुरक्षा नीति में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। माना जा रहा है कि भविष्य में फिनलैंड रूस की सीमा के करीब परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम F-35 लड़ाकू विमानों की तैनाती और सहयोगी देशों के साथ परमाणु साझेदारी के विकल्पों पर आगे बढ़ सकता है।

संसद की मंजूरी के बाद बदली सुरक्षा नीति

फिनलैंड की संसद ने परमाणु ऊर्जा अधिनियम और आपराधिक संहिता में संशोधन का समर्थन किया है, जिससे देश की रक्षा नीति में बड़ा बदलाव आया है। अप्रैल 2023 में नाटो का सदस्य बनने के बाद फिनलैंड लगातार अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। सरकार का कहना है कि बदलते सुरक्षा माहौल को देखते हुए यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।

F-35 लड़ाकू विमानों पर टिकी हैं निगाहें

फिनलैंड ने पहले ही अमेरिका से 64 F-35A लड़ाकू विमान खरीदने का फैसला किया है। यह विमान पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता भी रखते हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यदि परमाणु साझाकरण समझौता होता है तो ये विमान फिनलैंड की सामरिक क्षमता को और मजबूत कर सकते हैं।

अमेरिका और सहयोगी देशों के साथ बढ़ सकता है रक्षा सहयोग

अमेरिका पहले से जर्मनी, इटली, बेल्जियम, नीदरलैंड और तुर्की जैसे देशों के साथ परमाणु साझाकरण व्यवस्था के तहत काम करता है। ऐसे में फिनलैंड को भी संभावित भागीदार के रूप में देखा जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग समझौते को लेकर बातचीत जारी है, जिससे अमेरिकी सैन्य ढांचे और संसाधनों की तैनाती को सुविधा मिल सकती है।

फ्रांस के साथ भी विकल्पों पर विचार

फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो ने हाल ही में संकेत दिया था कि देश फ्रांस के साथ भी रक्षा सहयोग के विकल्पों पर विचार कर सकता है। ऐसी स्थिति में फ्रांसीसी परमाणु क्षमता वाले लड़ाकू विमानों की तैनाती की संभावना भी भविष्य में चर्चा का विषय बन सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।

रूस ने पहले ही दी थी प्रतिक्रिया की चेतावनी

रूस पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि यदि उसकी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा होता है तो वह आवश्यक कदम उठाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि फिनलैंड और नाटो के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है। नाटो में फिनलैंड के शामिल होने के बाद रूस और गठबंधन के बीच यूरोप में जमीनी सीमा पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है।

रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है फिनलैंड की स्थिति

रूस की सीमा से सटे होने और आर्कटिक क्षेत्र के नजदीक स्थित होने के कारण फिनलैंड की भौगोलिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यही वजह है कि वहां किसी भी प्रकार की उन्नत सैन्य तैनाती को क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

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