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डोटासरा का भाजपा पर तीखा हमला, महिला आरक्षण और परिसीमन पर उठाए सवाल


राजस्थान की सियासत में महिला आरक्षण मुद्दे पर घमासान तेज हो गया है। Govind Singh Dotasra ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन के जरिए राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश की गई, जिसे विपक्ष ने समय रहते उजागर किया।

महिला आरक्षण पर सियासी टकराव तेज

राजस्थान में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जहां भाजपा विपक्ष को महिला विरोधी बता रही है, वहीं कांग्रेस केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है। डोटासरा ने कहा कि यह मुद्दा केवल महिलाओं के अधिकारों का नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी बन गया है। उनके अनुसार, सरकार ने इस विधेयक को जिस तरह से पेश किया, उससे कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं और इसकी टाइमिंग भी राजनीतिक रूप से संदिग्ध नजर आती है।

नोटिफिकेशन में देरी पर उठाए सवाल

डोटासरा ने महिला आरक्षण बिल के गजट नोटिफिकेशन में देरी को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जो विधेयक सितंबर 2023 में संसद से पारित हो गया था, उसे लागू करने में तीन साल क्यों लग गए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि 15 अप्रैल 2026 को देर रात नोटिफिकेशन जारी करने की क्या वजह थी। उनके मुताबिक, यह जल्दबाजी और समय चयन सरकार की रणनीति पर सवाल खड़ा करता है और यह संकेत देता है कि इसके पीछे कुछ छिपी हुई राजनीतिक गणनाएं हो सकती हैं।

परिसीमन को लेकर गंभीर आरोप

डोटासरा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण के जरिए देश में अपनी सुविधा के अनुसार परिसीमन लागू करना चाहती थी। उनका कहना है कि 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना थी, जिससे राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन आयोग की नियुक्ति केंद्र के हाथ में होने से इसका इस्तेमाल सत्ता के पक्ष में किया जा सकता है, जिससे चुनावी परिणामों पर असर पड़ने की आशंका रहती है।

बड़े राज्यों को प्राथमिकता देने का आरोप

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसकी रणनीति उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्यों में सीटें बढ़ाने की है, जिससे दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। उनके अनुसार, यह कदम केवल कुछ राज्यों के आधार पर लंबे समय तक सत्ता में बने रहने की योजना का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की नीति से देश के संघीय ढांचे और संतुलन पर भी असर पड़ सकता है।

ओबीसी आरक्षण और जनगणना का मुद्दा

ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर डोटासरा ने कहा कि केंद्र सरकार नई जनगणना से बच रही है, क्योंकि इससे आरक्षण के नए आंकड़े सामने आएंगे। उन्होंने दावा किया कि जनगणना होते ही सरकार को ओबीसी वर्ग को अधिक प्रतिनिधित्व देना पड़ेगा, जिसके लिए वह तैयार नहीं है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि पंचायत और निकाय स्तर पर महिलाओं को 33% आरक्षण देने की पहल कांग्रेस ने ही की थी।

मुख्यमंत्री पर भी साधा निशाना

डोटासरा ने राजस्थान के मुख्यमंत्री की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी तंज कसा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने तैयार भाषण पढ़ा और स्वतंत्र रूप से अपनी बात नहीं रखी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उपमुख्यमंत्री Diya Kumari को बोलने का मौका नहीं दिया गया, जो भाजपा के महिला सशक्तिकरण के दावों पर सवाल उठाता है।

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