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दिल्ली में कब तक साफ होगी यमुना? मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताई समयसीमा, ‘बर्थडे विद यमुना’ अभियान भी होगा शुरू

दिल्ली में यमुना की सफाई को लेकर सरकार ने अगले ढाई साल का लक्ष्य सामने रखा है। जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने दावा किया कि अगले चुनाव तक यमुना की स्थिति में बड़ा सुधार दिखाई दे सकता है। उन्होंने कहा कि अगले छह महीने से एक साल के भीतर बदलाव नजर आने लगेगा। वहीं, डेढ़ साल में पानी की गुणवत्ता में सुधार और ढाई साल में सफाई के बेहतर नतीजे मिलने की उम्मीद जताई। सरकार ‘बर्थडे विद यमुना’ कार्यक्रम भी शुरू करने की तैयारी में है, जिसके तहत लोग नदी किनारे जन्मदिन मनाने के साथ सफाई अभियान में हिस्सा ले सकेंगे।

‘यमुना चलो अभियान’ के तहत 70 घाटों पर सफाई

दिल्ली में 18 अक्टूबर को यमुना के 70 घाटों पर सफाई अभियान चलाया गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मंत्री प्रवेश वर्मा ने भी इसमें भाग लिया। सरकार के अनुसार, अभियान में स्वयंसेवकों, सामाजिक संगठनों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।प्रवेश वर्मा के मुताबिक, अभियान में करीब 20 हजार सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग और स्वयंसेवक शामिल हुए। इसके अलावा भाजपा के लगभग 10,500 कार्यकर्ताओं तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के 27 कॉलेजों के विद्यार्थियों ने भागीदारी की। इस अभियान का उद्देश्य यमुना के घाटों पर जमा कचरा, प्लास्टिक और धार्मिक अवशेष हटाना था। हालांकि, घाटों की सफाई और नदी के पानी को प्रदूषणमुक्त बनाने की प्रक्रिया अलग-अलग हैं। नदी की गुणवत्ता में स्थायी सुधार के लिए गंदे पानी का उपचार और नालों के प्रदूषण पर नियंत्रण भी जरूरी होगा।

‘बर्थडे विद यमुना’ कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी

मंत्री प्रवेश वर्मा ने ‘बर्थडे विद यमुना’ नाम से एक नई पहल शुरू करने की बात कही है। इसके तहत दिल्लीवासियों से अपील की जाएगी कि वे अपने जन्मदिन पर यमुना किनारे आएं, परिवार के साथ समय बिताएं और सफाई अभियान में हिस्सा लें।उन्होंने बताया कि इसके लिए घाटों पर विशेष व्यवस्था बनाने की योजना है। इस पहल का उद्देश्य लोगों को नदी से जोड़ना और स्वच्छता को सामुदायिक गतिविधि बनाना है।सरकार की योजना है कि लोग जन्मदिन जैसे निजी अवसरों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ें। हालांकि, कार्यक्रम की विस्तृत व्यवस्था और शुरुआत की तारीख को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

22 अक्टूबर को 8,941 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का कार्यक्रम

प्रवेश वर्मा के अनुसार, 22 अक्टूबर को पश्चिमी दिल्ली में मटियाला-नजफगढ़ क्षेत्र के पास UER-2 के निकट सुबह 11 बजे एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के शामिल होने की बात कही गई है।मंत्री ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस कार्यक्रम में करीब 8,941 करोड़ रुपये की योजनाओं का शिलान्यास करेंगे। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के भी कार्यक्रम में मौजूद रहने की जानकारी दी गई है।बताए गए कार्यों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), सीवर नेटवर्क, पंपिंग स्टेशन और घरों को सीवर कनेक्शन देने जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य गंदे पानी को बिना उपचार के यमुना में पहुंचने से रोकना है।

यमुना में गिरने वाले 22 नालों पर काम करने का दावा

मंत्री ने कहा कि यमुना में गंदा पानी पहुंचाने वाले 22 नालों के प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके लिए सीवर नेटवर्क और सीवेज ट्रीटमेंट की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।प्रवेश वर्मा के मुताबिक, दिल्ली में पहले से मौजूद 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में से 28 को अपग्रेड किया जा चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि सीवेज उपचार क्षमता में करीब 250 एमजीडी का अंतर है, जिसे पूरा करना आवश्यक है।एमजीडी का अर्थ है मिलियन गैलन प्रतिदिन। यह पानी के प्रवाह या उपचार क्षमता को मापने की इकाई है। सरकार के सामने चुनौती यह है कि सीवर से निकलने वाला गंदा पानी उपचार संयंत्रों तक पहुंचे और उपचार के बाद ही नदी में छोड़ा जाए।

दिल्ली की 240 कॉलोनियों में सीवर कनेक्शन देने की योजना

प्रवेश वर्मा ने बताया कि दिल्ली की 240 नई कॉलोनियों में सीवर कनेक्शन देने का काम किया जा रहा है। इनमें वे कॉलोनियां भी शामिल हैं, जो पहले अनधिकृत थीं।घरों को सीवर नेटवर्क से जोड़ने से घरेलू गंदे पानी को सीधे नालों या यमुना में जाने से रोकने में मदद मिल सकती है। लेकिन इसके लिए सीवर लाइन बिछाने के साथ उपचार संयंत्रों की पर्याप्त क्षमता और नियमित संचालन भी जरूरी होगा।यमुना की सफाई के लिए केवल नदी किनारे कचरा हटाना पर्याप्त नहीं है। सीवेज का प्रभावी उपचार, औद्योगिक अपशिष्ट पर नियंत्रण और परियोजनाओं का समय पर पूरा होना भी अहम रहेगा।

साबरमती की तर्ज पर बनेगा यमुना रिवरफ्रंट

मंत्री प्रवेश वर्मा ने दिल्ली में साबरमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर यमुना रिवरफ्रंट विकसित करने की योजना का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, इसके लिए संबंधित अधिकारियों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।योजना को दो चरणों में विकसित करने का प्रस्ताव है। पहले चरण में पल्ला से वजीराबाद तक और दूसरे चरण में वजीराबाद से कालिंदी कुंज तक का क्षेत्र शामिल होगा।मंत्री ने दावा किया कि अगले चुनाव से पहले दिल्लीवासियों को रिवरफ्रंट का मॉडल दिखाया जाएगा। हालांकि, परियोजना की समयसीमा, निर्माण की लागत और विभिन्न चरणों की स्वीकृतियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही इसकी प्रगति का आकलन किया जा सकेगा।

क्या अगले ढाई साल में साफ हो जाएगी यमुना?

प्रवेश वर्मा ने अगले छह महीने से एक साल के भीतर बदलाव दिखाई देने की उम्मीद जताई। उनके अनुसार, डेढ़ साल में पानी की गुणवत्ता में सुधार दिख सकता है और ढाई साल में यमुना की सफाई को लेकर बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।लेकिन यमुना की वास्तविक स्थिति का आकलन केवल घाटों की सफाई या रिवरफ्रंट निर्माण से नहीं होगा। इसके लिए पानी की गुणवत्ता, सीवेज उपचार की क्षमता, नालों से आने वाले प्रदूषण और नियमित निगरानी के आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे।फिलहाल ढाई साल की समयसीमा मंत्री का दावा है, न कि यमुना पूरी तरह साफ होने की स्वतंत्र रूप से प्रमाणित गारंटी। आने वाले महीनों में परियोजनाओं की प्रगति और पानी की गुणवत्ता के आधिकारिक आंकड़ों से ही पता चलेगा कि सफाई अभियान कितना असरदार रहा है।

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