दौसा में करंट से पिता-पुत्र की मौत, चार बहनों का इकलौता भाई था सचिन; एक साथ उठीं दोनों की अर्थियां
राजस्थान के दौसा जिले के ढोलका दांगड़ा गांव में बिजली का करंट लगने से पिता और बेटे की मौत हो गई। 50 वर्षीय रतीराम गुर्जर और उनके 21 वर्षीय बेटे सचिन गुरुवार सुबह खेत पर काम करने गए थे। काफी देर तक घर नहीं लौटने पर परिजन खेत पहुंचे, जहां दोनों के शव मिले। सचिन चार बहनों का इकलौता भाई था और जयपुर में नर्सिंग की तैयारी कर रहा था। पिता-पुत्र की एक साथ मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। दोपहर बाद एक ही घर से दोनों की अर्थियां उठीं तो गांव में शोक छा गया। ग्रामीणों के मुताबिक, दुख के कारण कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले।
खेत पर काम करने गए पिता-पुत्र की करंट से मौत
दौसा जिले के गुढ़ाकटला क्षेत्र के ढोलका दांगड़ा गांव में गुरुवार को दर्दनाक हादसा हुआ। गांव निवासी रतीराम गुर्जर (50) और उनका बेटा सचिन गुर्जर (21) सुबह खेत पर काम करने गए थे। दोनों के घर वापस नहीं लौटने पर परिजनों को चिंता हुई।बताया गया कि रतीराम के भाई सुरेश ट्रैक्टर लेकर खेत पर पहुंचे। वहां उन्होंने रतीराम और सचिन को मृत अवस्था में देखा। दोनों के शरीर पर जलने के निशान थे। इसके बाद परिवार और ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी गई।परिजनों के अनुसार, दोनों की मौत बिजली का करंट लगने से हुई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। इसके बाद दोनों के शव उप जिला अस्पताल बांदीकुई ले जाए गए। पुलिस ने मामले की जानकारी जुटाकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
बचाने की कोशिश में दूसरे को भी लगा करंट, शुरुआती आशंका
घटना के समय खेत पर पिता और पुत्र ही मौजूद थे। शुरुआती अनुमान के अनुसार, संभव है कि पहले दोनों में से किसी एक को करंट लगा हो। उसे बचाने की कोशिश में दूसरा भी बिजली की चपेट में आ गया हो।हालांकि, यह घटना किस परिस्थिति में हुई और करंट लगने का वास्तविक कारण क्या था, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। खेत पर बिजली के तारों या उपकरणों की स्थिति से जुड़े पहलुओं की जानकारी भी जांच में सामने आ सकती है।हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। एक ही घटना में पिता और बेटे की मौत से परिवार के सामने भावनात्मक और पारिवारिक संकट खड़ा हो गया है।
रेलवे में कार्यरत थे रतीराम, नर्सिंग की तैयारी कर रहा था सचिन
परिजनों के मुताबिक, रतीराम गुर्जर बांदीकुई रेलवे में कार्यरत थे। वहीं, उनका बेटा सचिन जयपुर में नर्सिंग की तैयारी कर रहा था। परिवार को सचिन से भविष्य में काफी उम्मीदें थीं।सचिन पढ़ाई करके अपने परिवार का सहारा बनना चाहता था। उसकी उम्र अभी केवल 21 वर्ष थी। परिवार के सपनों और उम्मीदों के बीच हुई इस घटना ने सभी को झकझोर दिया।पिता-पुत्र की मौत की खबर फैलते ही गांव के लोग बड़ी संख्या में परिवार के घर पहुंचने लगे। हर कोई शोकाकुल परिजनों को सांत्वना देने की कोशिश कर रहा था। लेकिन परिवार के दो सदस्यों को एक साथ खोने का दुख इतना गहरा था कि वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
चार बहनों का इकलौता भाई था सचिन
इस हादसे का सबसे दुखद पहलू यह है कि सचिन अपने परिवार में चार बहनों का इकलौता भाई था। पिता की मौत के साथ परिवार ने बेटे को भी खो दिया। इस दोहरे सदमे ने चारों बहनों और अन्य परिजनों को तोड़कर रख दिया।पिता और भाई के शव देखकर बहनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिवार के लिए यह क्षति केवल दो सदस्यों को खोने तक सीमित नहीं है। एक साथ पिता और इकलौते भाई की मौत ने उनके जीवन में ऐसा खालीपन पैदा कर दिया, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा।गांव के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं। ग्रामीणों के अनुसार, रतीराम और सचिन मिलनसार स्वभाव के थे। उनकी अचानक मौत की खबर से पूरे गांव में शोक फैल गया।
एक ही घर से उठीं पिता-पुत्र की अर्थियां
गुरुवार दोपहर जब एक ही घर से पिता और बेटे की अर्थियां उठीं, तो माहौल गमगीन हो गया। एक साथ दो अर्थियां निकलते देखकर परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं।खुशियों और त्योहारों के समय से ठीक पहले हुए इस हादसे ने गांव को गहरे शोक में डाल दिया। ग्रामीणों के मुताबिक, घटना से दुखी कई पड़ोसियों के घरों में भी चूल्हे नहीं जले।गांव के लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना जताई और इस मुश्किल समय में साथ खड़े रहने की बात कही। पिता-पुत्र की एक साथ हुई मौत ने पूरे क्षेत्र में बिजली सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा की है।
करवा चौथ से पहले परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
करवा चौथ का पर्व नजदीक होने के बीच परिवार में यह हादसा हुआ। रतीराम की मौत से उनकी पत्नी ने अपना जीवनसाथी खो दिया, वहीं चारों बेटियों ने पिता और भाई दोनों को खोने का दुख झेला।सचिन की पढ़ाई और भविष्य को लेकर परिवार ने जो उम्मीदें संजोई थीं, वे भी इस हादसे के साथ अधूरी रह गईं। परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन है।ग्रामीणों ने बताया कि पिता और पुत्र दोनों का व्यवहार मिलनसार था। सचिन पढ़ाई के जरिए आगे बढ़ना चाहता था। लेकिन खेत पर हुए इस हादसे ने परिवार की जिंदगी अचानक बदल दी।
बिजली सुरक्षा को लेकर सतर्कता जरूरी
खेती के काम के दौरान बिजली के तारों, मोटरों और अन्य उपकरणों से जुड़े जोखिम बने रह सकते हैं। ऐसे में खेतों में बिजली व्यवस्था की नियमित जांच और खराब तारों या उपकरणों की समय पर मरम्मत महत्वपूर्ण है।यदि किसी व्यक्ति को बिजली का करंट लग जाए, तो उसे सीधे छूने के बजाय पहले बिजली की आपूर्ति बंद करना जरूरी होता है। मदद के लिए तुरंत आपातकालीन सेवाओं को सूचना देनी चाहिए।ढोलका दांगड़ा गांव में पिता-पुत्र की मौत का वास्तविक कारण जांच के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल इस हादसे ने एक परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है। एक ही घर से पिता और बेटे की अर्थियां उठने का दृश्य गांव के लोगों के लिए लंबे समय तक याद रहने वाला दर्दनाक पल बन गया।