जयपुर में युवती की संदिग्ध मौत पर बढ़ा विवाद, CBI जांच की मांग को लेकर भाजपा मुख्यालय के बाहर धरना
जयपुर के प्रतापनगर क्षेत्र में युवती की संदिग्ध मौत का मामला फिर चर्चा में आ गया है। निष्पक्ष जांच और सीबीआई जांच की मांग को लेकर पीड़ित परिवार भाजपा प्रदेश मुख्यालय के बाहर धरने पर बैठ गया। परिजनों का आरोप है कि उनकी बेटी की मौत को आत्महत्या बताकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है, जबकि उन्हें हत्या की आशंका है। पुलिस और भाजपा पदाधिकारियों ने परिवार से बातचीत कर समझाने का प्रयास किया, लेकिन परिजन अपनी मांगों पर कायम रहे।
आत्महत्या नहीं, हत्या का है संदेह: परिजनों का आरोप
पीड़ित परिवार का कहना है कि प्रतापनगर स्थित एक अपार्टमेंट में हुई युवती की मौत को शुरुआती जांच में आत्महत्या मान लिया गया, जबकि कई परिस्थितियां इस घटना को संदिग्ध बनाती हैं। परिजनों का आरोप है कि मामले की गहराई से जांच नहीं की गई और कई अहम सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच के बिना सच्चाई सामने नहीं आ सकती, इसलिए पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी, विशेष रूप से सीबीआई से कराई जानी चाहिए।
सीसीटीवी और मोबाइल रिकॉर्ड की गहन जांच की मांग
धरने पर बैठे परिवार ने मांग की कि घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की वैज्ञानिक तरीके से जांच कराई जाए। उनका कहना है कि वे घटना के बाद से लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं। इस दौरान कैंडल मार्च, प्रदर्शन और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग भी की गई, लेकिन अब तक उन्हें संतोषजनक कार्रवाई नहीं मिली। इसी वजह से उन्होंने भाजपा मुख्यालय के बाहर धरना देकर अपनी आवाज बुलंद की।
भाजपा पदाधिकारियों और पुलिस ने की समझाइश
धरने की सूचना मिलते ही अशोक नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों से बातचीत की। भाजपा प्रदेश कार्यालय प्रभारी मुकेश पारीक ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उनकी मांगों को गंभीरता से संबंधित स्तर तक पहुंचाने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता हर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना है। हालांकि परिजनों ने स्पष्ट किया कि जब तक सीबीआई जांच के आदेश नहीं दिए जाते और निष्पक्ष जांच का भरोसा नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
जांच पर टिकी सभी की निगाहें
फिलहाल मामले में पुलिस जांच जारी है, लेकिन परिवार सीबीआई जांच की मांग पर अडिग है। यह मामला अब कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ जनचर्चा का विषय भी बन गया है। आगे जांच एजेंसियों की कार्रवाई और सरकार के निर्णय पर ही यह तय होगा कि मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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