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“संविधान दिवस: दो युवा न्यायिक अधिकारियों की अनोखी शादी”

संविधान दिवस पर कोटपूतली-बहरोड़ जिला कलक्टर कार्यालय एक प्रेरणादायक पल का साक्षी बना, जब दो न्यायिक अधिकारियों ने बिना दहेज, बिना दिखावे और पूरी सादगी के साथ विवाह कर समाज को एक नया संदेश दिया। संविधान को सर्वोपरि मानने वाले इस नवदंपत्ति ने अपने विशेष दिन को देश के सर्वोच्च ग्रंथ को समर्पित कर एक सुंदर मिसाल पेश की।

अनोखा विवाह समारोह | संविधान बना साक्षी

हेडलाइन: संविधान दिवस पर संपन्न हुई सादगीपूर्ण शादी
बानसूर के गुंता शाहपुर निवासी हेमन्त मेहरा और हनुमानगढ़ की करीना काला ने बुधवार को संविधान दिवस पर कलक्टर कार्यालय परिसर में विवाह संस्कार पूरे किए। दोनों न्यायिक अधिकारियों ने समाज में व्याप्त दहेज और अनावश्यक खर्चों के खिलाफ खड़े होते हुए संविधान को साक्षी बनाया।
हेमन्त मेहरा वर्तमान में चौथ का बरवाड़ा (सवाई माधोपुर) में सिविल जज के पद पर कार्यरत हैं, जबकि करीना काला प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारी हैं। दोनों का कहना है कि न्यायिक सेवा में रहते हुए वे संविधान को सर्वोच्च मानते हैं और इसी आस्था के चलते उन्होंने विशेष दिन का चयन किया।

प्रशासन की उपस्थिति | कलक्टर और एडीएम रहे साक्षी

वर-वधू को कलक्टर प्रियंका गोस्वामी ने दिया आशीर्वाद

सादगीपूर्ण समारोह में दोनों परिवारों के साथ जिला कलक्टर प्रियंका गोस्वामी और एडीएम ओमप्रकाश सहारण भी मौजूद रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देते हुए उनके वैवाहिक जीवन की उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

समाज के लिए प्रेरणा | दहेज-मुक्त विवाह की मिसाल

युवा जजों ने दिया सादगी और समानता का संदेश

दहेज-मुक्त और बिना फिजूलखर्ची की इस शादी ने समाज के सामने नई राह दिखाई है। नवदंपत्ति का यह निर्णय न केवल समानता का संदेश देता है, बल्कि समाज को सादगी, संवैधानिक मूल्यों और सकारात्मक बदलाव की दिशा में प्रेरित भी करता है।
दो युवा न्यायिक अधिकारियों द्वारा किया गया यह सराहनीय कदम दहेज-विरोध और सामाजिक सुधार का मजबूत संदेश बनकर सामने आया है।

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