अंता उपचुनाव में कांग्रेस का धमाका: भाया ने भाजपा को उसके ही गढ़ में दी करारी शिकस्त, पार्टी में मंथन तेज…
राजस्थान की राजनीति में बड़ा उलटफेर… अंता विधानसभा सीट, जिसे भाजपा का पारंपरिक गढ़ माना जाता रहा है, वहां कांग्रेस ने 23 महीने बाद शानदार वापसी करते हुए भाजपा से सीट छीन ली। त्रिकोणीय मुकाबले, संगठनात्मक रणनीति और गांव-गांव की पकड़ ने कांग्रेस को जीत दिलाई… जबकि वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले इस क्षेत्र में भाजपा को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा। क्या यह हार सरकार के जनाधार में गिरावट का संकेत है? क्या भाजपा में होने जा रहा है बड़ा बदलाव? पेश है अंता उपचुनाव की स्पेशल रिपोर्ट…
जयपुर| राजस्थान की सियासत में अंता विधानसभा सीट ने बड़ा संदेश दिया है। कांग्रेस ने महज़ 23 महीनों में भाजपा से यह सीट वापस जीत ली है। त्रिकोणीय मुकाबले वाले इस हाई-प्रोफाइल उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया ने भाजपा के मोरपाल सुमन को 15,612 वोटों के भारी अंतर से हराया।
भाया को 69,571 वोट, भाजपा के मोरपाल सुमन को 53,959 वोट, जबकि निर्दलीय नरेश मीणा तीसरे स्थान पर रहकर 53,800 वोट ले गए। दूसरे और तीसरे स्थान के बीच सिर्फ 159 वोटों का मामूली अंतर रहा।
भाजपा के लिए यह हार इसलिए और कड़वी रही क्योंकि यह सीट पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और उनके सांसद बेटे दुष्यंत सिंह की परंपरागत पकड़ मानी जाती है। पूरा चुनावी कमान उन्हीं के हाथ में था, लेकिन जमीनी माहौल को बदल पाने में भाजपा नाकाम रही। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी अंतिम दिनों में दो रोड शो किए, पर उसका प्रभाव सीमित रहा।
कांग्रेस की जीत के प्रमुख कारण जो रहे : मैदान में एकजुटता नजर आई , संगठन की मशीनरी और भाया की गहरी पकड़ इस चुनाव में कांग्रेस का सबसे बड़ा हथियार रही उसकी एकजुटता और आक्रामक संगठनात्मक तैयारी भी मजबूत रही ,
चुनाव घोषित होते ही पार्टी ने तेजी दिखाते हुए प्रमोद जैन भाया का नाम सबसे पहले तय किया। इसके बाद कांग्रेस लगातार मैदान में डटी रही—
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, टीकाराम जूली, अशोक गहलोत, सचिन पायलट, और चुनाव प्रभारी अशोक चांदना ने लगातार सभाएं कीं।
डोटासरा ने क्षेत्र की 57 पंचायतों में 5-5 कार्यकर्ता नियुक्त कर एक तरह से बूथ-वार चुनाव को मैनेज किया। जयपुर से चल रहे वॉर रूम में हर गतिविधि की लाइव मॉनिटरिंग की जाती रही।
सोशल मीडिया पर भाया के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों का कांग्रेस ने तथ्यात्मक जवाब देकर हवा निकाल दी।
भाया की गांव-गांव मजबूत पकड़ और लगातार जनसंपर्क ने अंततः कांग्रेस को निर्णायक बढ़त दिला दी।
अंता का संदेश साफ: “दो साल से काम नहीं हुआ” — टीकाराम जूली
कांग्रेस की जीत पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा—
“अंता की जनता ने स्पष्ट जनादेश दे दिया है। लोग कह रहे हैं कि दो साल में यहां कोई विकास नहीं हुआ। हमारी पिछली सरकार की योजनाओं को रोका गया और परिणाम आज सामने है। यह उपचुनाव तो सिर्फ टेस्ट था… जल्द ही सरकार का मोरिया बोल सकता है।”
जूली ने यह भी दावा किया कि मंत्रियों के इस्तीफे भी जल्द लिए जा सकते हैं।
हार के बाद भाजपा में हलचल, ठीकरा किसके सिर?
हार के बाद भाजपा में आत्ममंथन शुरू हो चुका है।
प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए कहा—
“सरकार के काम जनता तक नहीं पहुंचा पाए। अंता की हार संगठन के मुखिया के रूप में मेरी जवाबदेही है। भाजपा जनादेश का सम्मान करती है।”
इधर पार्टी के अंदरूनी हलकों में चर्चा तेज है कि हार का असल कारण संगठन की कमजोरी, स्थानीय असंतोष और टिकट चयन में गड़बड़ी रही।
उधर, मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर नई अटकलें पैदा हो गई हैं। माना जा रहा है कि भाजपा हाईकमान अब राजस्थान को नए नजरिए से देख सकता है और बड़े बदलावों की संभावना बन रही है।
कुल मिलाकर अंता उपचुनाव ने एक बात स्पष्ट कर दी— लोकसभा जीत के बाद भी राजस्थान में भाजपा का जनाधार चुनौतीपूर्ण स्थिति में है। कांग्रेस ने रणनीति, एकजुटता और जमीनी नेटवर्क के दम पर भाजपा का गढ़ तोड़ दिया है।
अब नजरें इस बात पर होंगी कि हार से सबक लेकर भाजपा क्या बदलाव करती है और क्या यह नतीजा आगामी राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा देगा।