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बिहार रिज़ल्ट पर कांग्रेस का वार: ‘जनता का फैसला मंज़ूर, लेकिन वोट प्रक्रिया संदिग्ध’…

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आते ही राजनीतिक तापमान फिर बढ़ गया है। कांग्रेस ने अपनी करारी हार को स्वीकार तो किया, लेकिन चुनाव की निष्पक्षता पर बड़े सवाल भी खड़े किए। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने यह दावा किया कि बिहार में मतदान प्रक्रिया शुरुआत से पारदर्शी नहीं थी और “वोट चोरी” जैसी स्थितियों ने लोकतांत्रिक भावना को ठेस पहुंचाई है।

कांग्रेस की पहली प्रतिक्रिया: हार स्वीकार, प्रक्रिया पर सवाल

राहुल गांधी ने परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी जनता के निर्णय का सम्मान करती है, लेकिन मतदान और गिनती की प्रक्रिया पर गंभीर संदेह बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई सीटों पर प्रशासनिक हस्तक्षेप और चुनावी अनियमितताएँ साफ दिखाई दीं।

कांग्रेस की यह टिप्पणी सिर्फ हार की सफाई नहीं बल्कि विपक्ष को एकजुट करने की रणनीति भी मानी जा रही है, ताकि 2026-27 के चुनावी कैलेंडर में “चुनावी पारदर्शिता” बड़ा मुद्दा बने।

‘वोट चोरी’ का आरोप: राहुल गांधी का बड़ा दावा

राहुल गांधी ने कहा कि शुरू से ही संकेत मिल रहे थे कि बिहार में चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हुई है। उनका दावा है कि कई जगहों पर मतगणना में देरी और संदिग्ध पैटर्न देखने को मिले, जो लोकतंत्र को कमजोर करते हैं।

इस बयान से कांग्रेस चाहती है कि जनता के बीच यह नैरेटिव बने कि मुकाबला बराबरी का था, लेकिन तकनीकी व प्रशासनिक बाधाओं ने अंतिम परिणामों को झुका दिया।

विपक्ष की रणनीति: मुद्दे को राष्ट्रीय मंच पर ले जाने की तैयारी

कांग्रेस के भीतर से खबर है कि पार्टी जल्द ही इस पूरे मामले को संसद और चुनाव आयोग के समक्ष उठाएगी। विपक्ष इसे “चुनावी सुधार” और “गिनती की पारदर्शिता” के मुद्दे से जोड़कर राष्ट्रीय विमर्श बनाएगा।

पिछले कुछ वर्षों में विपक्ष लगातार EVM पारदर्शिता, बूथ प्रबंधन और निगरानी को लेकर सवाल उठाता आया है। बिहार का मुद्दा अब इस बहस को फिर से गति दे सकता है।

बिहार परिणाम का राजनीतिक संदेश: कांग्रेस के लिए चेतावनी

कांग्रेस की शर्मनाक हार एक बार फिर यह संकेत देती है कि संगठनात्मक कमजोरी, नेतृत्व के अभाव और जमीनी स्तर पर कमजोर पकड़ से पार्टी को भारी नुकसान हो रहा है। राहुल गांधी का बयान भी इसी दबाव से उपजा दिखाई देता है।

नतीजे बताते हैं कि गठबंधन राजनीति में कांग्रेस की भूमिका लगातार सिकुड़ती जा रही है। अगर पार्टी संगठन नहीं सुधारती तो आने वाले राज्यों में भी चुनौती और गहरी हो सकती है।

आगे की राह: कांग्रेस का नया रुख?

राहुल गांधी ने संकेत दिया कि पार्टी चुनावी पारदर्शिता को लेकर एक राष्ट्रीय अभियान चलाएगी। संगठनात्मक सुधार और राज्यों में नए नेतृत्व की नियुक्ति पर भी जल्द कदम उठाए जा सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस को सिर्फ चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय, अपनी रणनीति और जमीनी संरचना को मजबूत करना होगा—वरना 2029 की लड़ाई और कठिन होगी।

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