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China Spy Satellite: भारत की मिसाइलों पर चीन की पैनी नजर! थर्मल सिग्नेचर पकड़ने वाला जासूसी सैटेलाइट लॉन्च, बढ़ी सुरक्षा चिंता

चीन ने ऐसा नया सैटेलाइट लॉन्च किया है, जिसे रक्षा विशेषज्ञ संभावित मिसाइल चेतावनी और जासूसी प्रणाली का हिस्सा मान रहे हैं। TJS-25 (टोंगक्सिन जिशु शियान-25) नाम का यह उपग्रह कथित तौर पर मिसाइल लॉन्च के दौरान निकलने वाले थर्मल (हीट) सिग्नेचर और इलेक्ट्रॉनिक संकेतों का पता लगाने में सक्षम हो सकता है। हालांकि चीन इसे अगली पीढ़ी का संचार परीक्षण उपग्रह बता रहा है, लेकिन रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इसकी क्षमताएं भारत सहित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की निगरानी और मिसाइल चेतावनी प्रणाली को मजबूत कर सकती हैं।

क्या है TJS-25 और क्यों चर्चा में है?

चीन ने 11 जून को वेनचांग स्पेस लॉन्च सेंटर से लॉन्ग मार्च-5 रॉकेट के जरिए TJS-25 लॉन्च किया। आधिकारिक तौर पर इसे एक कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी टेस्ट सैटेलाइट बताया गया है, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों और सैटेलाइट ट्रैकर्स का दावा है कि इसका वास्तविक उद्देश्य सैन्य निगरानी और अर्ली मिसाइल वॉर्निंग सिस्टम को मजबूत करना हो सकता है। यदि यह आकलन सही साबित होता है, तो चीन को मिसाइल लॉन्च की शुरुआती जानकारी पहले से अधिक तेजी से मिल सकेगी।

मिसाइलों के थर्मल सिग्नेचर पकड़ने की क्षमता

विशेषज्ञों के अनुसार TJS-25 में अत्याधुनिक सेंसर और बड़े फोल्डेबल एंटीना लगाए गए हैं, जो मिसाइल लॉन्च के दौरान निकलने वाली गर्मी, रेडियो सिग्नल, रडार उत्सर्जन और टेलीमेट्री डेटा को ट्रैक करने में सक्षम हो सकते हैं। ऐसी तकनीक किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल की दिशा, गति और उड़ान प्रोफाइल का शुरुआती विश्लेषण करने में मदद कर सकती है। इससे संभावित मिसाइल रक्षा प्रणाली को समय रहते सक्रिय करने का अवसर मिल सकता है।

भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है रणनीतिक चुनौती?

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह सैटेलाइट हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और दक्षिण एशिया के ऊपर प्रभावी निगरानी करता है, तो भारत की रणनीतिक गतिविधियों पर चीन की नजर और मजबूत हो सकती है। विशेष रूप से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण और सैन्य गतिविधियों से जुड़े डेटा एकत्र करने की उसकी क्षमता भारत की सुरक्षा योजनाओं के लिए चुनौती बन सकती है। हालांकि इस संबंध में चीन ने भारत को लेकर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

TJS-24 और TJS-25 से बन रहा निगरानी नेटवर्क

चीन पहले भी TJS श्रृंखला के कई उपग्रह अंतरिक्ष में भेज चुका है। रिपोर्टों के अनुसार, TJS-24 दक्षिण चीन सागर और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में निगरानी से जुड़ा माना जाता है, जबकि TJS-25 को दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र पर अधिक फोकस करने वाला प्लेटफॉर्म माना जा रहा है। यदि दोनों उपग्रह समन्वित रूप से कार्य करते हैं, तो चीन की स्पेस-आधारित निगरानी क्षमता पहले से कहीं अधिक व्यापक हो सकती है।

भारत के सामने क्या हैं संभावित विकल्प?

बदलते अंतरिक्ष और मिसाइल युद्ध के दौर में भारत के लिए अपनी स्पेस-आधारित निगरानी प्रणाली, अर्ली वॉर्निंग नेटवर्क और मिसाइल रक्षा क्षमताओं को लगातार मजबूत करना अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वदेशी सैन्य उपग्रह, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस, आधुनिक रडार सिस्टम और अंतरिक्ष क्षेत्र में तकनीकी निवेश भविष्य की सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। साथ ही मित्र देशों के साथ रक्षा एवं अंतरिक्ष सहयोग भी भारत की रणनीतिक बढ़त बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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