#क्राइम #देश दुनिया #राज्य-शहर

“पेपर देने निकले बच्चे… घर लौटी सिर्फ मातम की खबर”

खेड़ली में दो बाइकों की भिड़ंत: नाबालिग सहित दो की मौत, परीक्षा देकर लौट रहे थे बच्चे

खेड़ली के समूची रोड पर मंगलवार दोपहर हुआ दर्दनाक हादसा कई परिवारों की खुशियों को पलभर में छीन ले गया। परीक्षा देकर लौट रहे नाबालिग छात्रों की बाइक की भिड़ंत में दो जिंदगियां खत्म हो गईं, जबकि चार घायल जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।

मंगलवार दोपहर करीब 12:30 बजे खेड़ली–समूची रोड पर दो बाइकों की जोरदार भिड़ंत में एक नाबालिग छात्र और एक युवक की मौके पर मौत हो गई। 3 नाबालिग और एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद रैफर कर दिया गया।

एक बाइक पर थे चार नाबालिग, दे रहे थे 9वीं कक्षा का पेपर

“अलीपुर से समूची पहुंचे थे चार छात्र, स्कूल ने नहीं दी किसी तरह की वाहन व्यवस्था”
अलीपुर (भरतपुर) निवासी चार नाबालिग छात्र कक्षा 9वीं का अर्द्धवार्षिक पेपर देने बाइक से समूची पहुंचे थे। पेपर देने के बाद वे खेडली रेलवे स्टेशन अपने साथी के भाई को लेने जा रहे थे, तभी हादसा हो गया।
मृतक शिवम (14) रिश्तेदार की बाइक लेकर आया था। उसके साथ दीपेश, अभिषेक और सनी सवार थे।

बुलेट सवार दीपक की भी मौके पर मौत

“समूची का 20 वर्षीय दीपक भी नहीं बच सका, साथी घायल”
दूसरी बाइक पर समूची निवासी 20 वर्षीय दीपक और उसका साथी सवार थे। भिड़ंत इतनी भीषण थी कि डॉक्टरों ने शिवम सैनी और दीपक को मृत घोषित कर दिया। चारों घायल—लोकेश, दीपेश, अभिषेक और सनी—गंभीर रूप से घायल हैं।

दो परिवारों पर कहर—घर की खुशियां मातम में बदलीं

“शिवम की 30 नवंबर को दो चचेरी बहनों की शादी, दीपक के परिवार में पहले से पिता की कमी”
14 वर्षीय शिवम के घर में दो चचेरी बहनों की शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन हादसे ने खुशियों को मातम में बदल दिया।
समूची निवासी मृतक दीपक पांच भाइयों में सबसे छोटा था। उसके पिता की मृत्यु 8 वर्ष पहले हो गई थी। परिवार पहले ही संघर्ष कर रहा था, अब यह हादसा नया सदमा बनकर आया।

शिक्षा व्यवस्था की खामियां भी बनी हादसे की वजह

“8वीं तक मान्यता, लेकिन चल रही थी 9वीं… पेपर देने बच्चों को जाना पड़ा दूसरे स्कूल”
अलीपुर के जिस निजी स्कूल में बच्चे पढ़ते थे, वहां केवल 8वीं तक की मान्यता थी। बावजूद इसके वहां गैर-मान्यता प्राप्त 9वीं कक्षा चल रही थी और विद्यालय संचालक ने छात्रों को समूची के एक निजी स्कूल से अटैच कर रखा था।
स्कूल ने बच्चों को पेपर देने लाने-ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं की, जिसके चलते ये चारों नाबालिग खुद बाइक से आए थे।

खेड़ली क्षेत्र में कई निजी स्कूल इसी तरह मानकों को धता बताकर मान्यता से ज्यादा कक्षाएं चला रहे हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों को जोखिम उठाना पड़ रहा है।

यह “हादसा सिर्फ सड़क पर नहीं हुआ, सिस्टम की लापरवाही ने भी ली दो जानें”

नाबालिग चालक, ओवरलोड बाइक और स्कूल प्रबंधन की उदासीनता हादसे की बड़ी वजहें रहीं।

बिना मान्यता 9वीं कक्षा चलाना और परीक्षा केंद्र का दूर होना बच्चों को जोखिम भरे सफर के लिए मजबूर कर देता है।

ऐसे मामलों में प्रशासनिक निगरानी और निजी स्कूलों की नियमित जांच बेहद जरूरी है।

यदि स्कूल बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था देते, तो शायद ये जिंदगियां बच सकती थीं।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *