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🚨 24 घंटे इंतजार के बाद भी इलाज नहीं, हर 5 में से 1 शख्स डॉक्टर को तरसा… कनाडा का हेल्थ सिस्टम खुद ICU में

भारतीय मूल के शख्स की मौत ने खोली पोल

कनाडा की यूनिवर्सल हेल्थकेयर व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हाल ही में 44 वर्षीय भारतीय मूल के प्रशांत श्रीकुमार को कार्डिएक अरेस्ट के बाद करीब 8 घंटे तक इलाज नहीं मिला। दर्द में तड़पते हुए उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना ने कनाडा में हेल्थ इमरजेंसी की भयावह तस्वीर सामने रख दी है।

कागजों में यूनिवर्सल, हकीकत में लाचार मरीज

कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन (CMA) के आंकड़े बताते हैं कि देश की यूनिवर्सल हेल्थकेयर सर्विस ज़मीनी स्तर पर बुरी तरह चरमरा चुकी है। हालात ऐसे हैं कि लाखों लोग बुनियादी इलाज के लिए भी भटकने को मजबूर हैं।

हर 5 में से 1 वयस्क के पास फैमिली डॉक्टर नहीं

कनाडा में लगभग 59 लाख वयस्क, यानी हर पांच में से एक व्यक्ति के पास फैमिली डॉक्टर या प्राइमरी हेल्थ केयर तक पहुंच नहीं है। जिनके पास यह सुविधा है, उन्हें भी इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।

CMA के मुताबिक:

  • केवल 36.9% लोग ही इमरजेंसी में 24 घंटे के भीतर अपॉइंटमेंट ले पाते हैं
  • 22.8% लोगों को या तो दो हफ्ते से ज्यादा इंतजार करना पड़ता है या फिर अपॉइंटमेंट मिलता ही नहीं

1984 का कानून, लेकिन अधूरी व्यवस्था

कनाडा में 1984 के हेल्थ एक्ट के तहत हर नागरिक को यूनिवर्सल हेल्थकेयर देने का प्रावधान है। इसके जरिए करीब 70% मेडिकल जरूरतें कवर होती हैं।
बाकी 30% इलाज—जैसे दांत, आंखें, फिजियोथेरपी और जेंडर थेरेपी—पूरी तरह प्राइवेट सिस्टम पर निर्भर हैं, जो आम लोगों के लिए महंगा साबित हो रहा है।

23 हजार से ज्यादा फैमिली डॉक्टरों की भारी कमी

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार कनाडा इस वक्त करीब 23,000 फैमिली डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। हालात सुधारने के लिए मौजूदा फैमिली फिजिशियन्स की संख्या में 49% बढ़ोतरी की जरूरत बताई गई है।

नर्सिंग स्टाफ का भी गंभीर संकट

डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सिंग स्टाफ की कमी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।
स्टैटिस्टिक्स कनाडा के अनुसार:

  • 2024 की दूसरी तिमाही तक 42,045 नर्सिंग पद खाली थे
  • पिछले 5 साल में नर्सिंग भर्तियों में 147% की बढ़ोतरी करनी पड़ी

सिर्फ ओटावा में ही जरूरत:

  • 28,000 रजिस्टर्ड नर्स
  • 14,000 लाइसेंस्ड प्रैक्टिकल नर्स
  • 2,700 से ज्यादा नर्स प्रैक्टिशनर

इसके अलावा हजारों थेरपिस्ट और फार्मासिस्ट की भी जरूरत है।

कम डॉक्टर, ज्यादा आबादी… मरीजों पर सीधा खतरा

कनाडा में हर 1,000 लोगों पर औसतन सिर्फ 2.8 डॉक्टर उपलब्ध हैं, जबकि विकसित देशों में यह औसत 3.7 है।
इस भारी कमी के कारण:

  • स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से मिलने में महीनों का इंतजार
  • गंभीर बीमारियों की पहचान में देरी
  • मरीजों की जान पर सीधा खतरा

साख पर सवाल, सिस्टम पर दबाव

हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो यह संकट सिर्फ मरीजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कनाडा की अंतरराष्ट्रीय साख पर भी गहरा असर डालेगा।


जिस यूनिवर्सल हेल्थकेयर सिस्टम को कभी कनाडा की ताकत माना जाता था, वही आज उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बनता जा रहा है। प्रशांत श्रीकुमार की मौत ने यह साफ कर दिया है कि इलाज मुफ्त होना काफी नहीं, समय पर इलाज मिलना ज़्यादा ज़रूरी है

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