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41 साल बाद कनाडा ने माना- एयर इंडिया ‘कनिष्क’ ब्लास्ट के पीछे खालिस्तानी आतंकी, 329 लोगों की गई थी जान

41 साल बाद कनाडा ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि 1985 में एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ में हुए भीषण बम धमाके के पीछे कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी आतंकियों का हाथ था। कनाडाई खुफिया एजेंसी CSIS ने इस हमले को ‘जघन्य आतंकवादी कृत्य’ बताते हुए 329 मृतकों को श्रद्धांजलि दी। इस स्वीकारोक्ति को भारत के लंबे समय से उठाए जा रहे आरोपों की बड़ी पुष्टि माना जा रहा है।

CSIS ने पहली बार खालिस्तानी आतंकियों की भूमिका स्वीकार की

1985 में एयर इंडिया फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ में हुए बम विस्फोट की 41वीं बरसी पर कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS (Canadian Security Intelligence Service) ने पहली बार सार्वजनिक रूप से माना कि यह हमला कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी आतंकियों द्वारा किया गया था। एजेंसी ने इसे कनाडा के इतिहास के सबसे भयावह आतंकी हमलों में से एक बताते हुए सभी 329 पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह बयान भारत के उस पुराने रुख की पुष्टि करता है, जिसमें लगातार कहा जाता रहा था कि हमले की साजिश कनाडा की धरती से रची गई थी।

1985 में हवा में उड़ाया गया था एयर इंडिया का विमान

23 जून 1985 को एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ मॉन्ट्रियल से लंदन होते हुए नई दिल्ली आ रही थी। लंदन पहुंचने से लगभग 45 मिनट पहले आयरलैंड के तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर विमान में शक्तिशाली विस्फोट हुआ। विस्फोट के बाद विमान हवा में ही टूट गया और समुद्र में गिर पड़ा। हादसे में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई। इनमें 268 कनाडाई नागरिक, जिनमें अधिकांश भारतीय मूल के थे, जबकि 24 यात्री भारत के नागरिक थे।

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बताया कनाडा का सबसे बड़ा आतंकी हमला

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस घटना को देश के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला बताया। उन्होंने कहा कि 41 साल पहले 329 निर्दोष लोगों की जान गई थी और कनाडा हर प्रकार के हिंसक आतंकवाद के खिलाफ मजबूती से खड़ा है। कार्नी ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह त्रासदी आज भी पूरे देश के लिए गहरा जख्म बनी हुई है।

जांच में क्या सामने आया था

जांच एजेंसियों के मुताबिक विस्फोटक एक सूटकेस में छिपाकर विमान के चेक-इन बैगेज में रखा गया था। जिस व्यक्ति के नाम पर बैग चेक-इन किया गया था, वह स्वयं विमान में सवार ही नहीं हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि हमला 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार के प्रतिशोध के रूप में किया गया था। जांचकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि सिख अलगाववादी संगठन से जुड़े आतंकियों ने इस साजिश को अंजाम दिया।

41 साल तक कनाडा खुलकर क्यों नहीं बोला?

कनाडा की सार्वजनिक जांच और बाद की रिपोर्टों में कई कारण सामने आए, जिनकी वजह से सरकार लंबे समय तक सीधे खालिस्तानी आतंकियों का नाम लेने से बचती रही। खुफिया एजेंसी CSIS द्वारा संदिग्धों की निगरानी से जुड़ी महत्वपूर्ण रिकॉर्डिंग नष्ट कर देना, CSIS और RCMP के बीच समन्वय की कमी, मुख्य गवाहों को धमकियां मिलना और अदालत में पर्याप्त सबूत पेश न हो पाना इस मामले की सबसे बड़ी कमजोरियां रहीं। 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने सरकारी विफलताओं के लिए माफी तो मांगी, लेकिन आधिकारिक दस्तावेजों में ‘खालिस्तानी आतंकवाद’ शब्द का स्पष्ट इस्तेमाल नहीं किया गया।

भारत-कनाडा संबंधों के बीच बदला रुख

हाल के वर्षों में भारत और कनाडा के बीच खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर तनाव लगातार बढ़ा है। इसी बीच CSIS की 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में पहली बार Canadian-Based Khalistani Extremists (CBKE) को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ नेटवर्क कनाडा की संस्थाओं का इस्तेमाल धन जुटाने और हिंसक गतिविधियों को समर्थन देने के लिए कर रहे हैं। अब एयर इंडिया ब्लास्ट को लेकर आधिकारिक स्वीकारोक्ति को भी इसी बदलते सुरक्षा दृष्टिकोण का हिस्सा माना जा रहा है।

आज भी दुनिया के सबसे भयावह विमान बम धमाकों में शामिल

एयर इंडिया फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ विस्फोट को आज भी किसी यात्री विमान पर हुए सबसे घातक बम धमाकों में गिना जाता है। हालांकि 2001 के 9/11 आतंकी हमलों के बाद वैश्विक स्तर पर इसकी चर्चा कम हुई, लेकिन भारत, कनाडा और आयरलैंड में यह घटना आज भी आतंकवाद की सबसे दर्दनाक त्रासदियों में शामिल है।

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