भरत तिवारी एनकाउंटर केस: आरोपी SDPO की नई पोस्टिंग पर विवाद
बिहार के चर्चित भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में नामजद आरोपी रहे तत्कालीन SDPO राजेश कुमार शर्मा को राज्य सरकार ने नई जिम्मेदारी सौंपते हुए पटना में मद्यनिषेध विभाग (Prohibition Unit) में DSP के पद पर तैनात किया है। 53 DSP के बड़े तबादला आदेश के तहत यह नियुक्ति हुई है, जिसने एक बार फिर इस संवेदनशील मामले को सुर्खियों में ला दिया है।
एनकाउंटर केस से शुरू हुआ विवाद
17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में STF और स्थानीय पुलिस की कार्रवाई के दौरान 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई थी। घटना को पुलिस ने एनकाउंटर बताया, लेकिन सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में भरत को कथित रूप से आत्मसमर्पण करते हुए दिखाया गया, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। मृतक की मां की शिकायत पर FIR दर्ज हुई, जिसमें तत्कालीन SDPO राजेश कुमार शर्मा समेत कई पुलिसकर्मियों को नामजद आरोपी बनाया गया।
FIR और प्रशासनिक कार्रवाई
मामला दर्ज होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने तत्काल कार्रवाई करते हुए राजेश कुमार शर्मा को फील्ड ड्यूटी से हटाकर पुलिस लाइन में भेज दिया था। इस दौरान उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर जांच भी जारी रही। प्रशासनिक दबाव और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्हें तत्कालीन जिम्मेदारियों से अलग कर दिया गया था और उनकी जगह नए अधिकारी की तैनाती की गई थी।
अब मिली नई जिम्मेदारी
हाल ही में गृह विभाग द्वारा जारी 53 DSP अधिकारियों की तबादला सूची में राजेश कुमार शर्मा का नाम शामिल किया गया है। उन्हें पटना में प्रोहिबिशन एंड स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में DSP के रूप में नियुक्त किया गया है। यह वही विभाग है जो शराबबंदी और नशा नियंत्रण से जुड़े मामलों की निगरानी करता है। इस नई पोस्टिंग को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
बिहार सरकार ने कुल 53 DSP और ADSP अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला किया है। इन अधिकारियों को ट्रैफिक, साइबर क्राइम, EOU, CID, स्पेशल ब्रांच और पुलिस अकादमी जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में तैनात किया गया है। इस फेरबदल का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना बताया गया है, हालांकि कुछ मामलों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी शुरू हो गई है।