बांग्लादेश में हिंसा का नया दौर? उस्मान हादी के बाद एक और नेता को सिर में गोली
सुलगता बांग्लादेश फिर दहला
छात्र नेता उस्मान हादी की मौत से उभरी हिंसा की लपटें अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थीं कि बांग्लादेश में एक और राजनीतिक हमले ने हालात को और गंभीर बना दिया है। नेशनल सिटीजन पार्टी के एक वरिष्ठ नेता को सिर में गोली मारे जाने की खबर से देश में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
🔫 खुलना में हमला: पार्टी नेता मोतालेब सिकदर घायल
बांग्लादेश की नेशनल सिटीजन पार्टी के खुलना मंडल प्रमुख और पार्टी समर्थित संगठन शक्ति के केंद्रीय आयोजक मोतालेब सिकदर को अज्ञात हमलावरों ने सिर में गोली मार दी। हमले के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
🔥 उस्मान हादी की हत्या के बाद उबाल पर हालात
इंकलाब मंच के प्रवक्ता और छात्र नेता उस्मान हादी की मौत के बाद पूरे बांग्लादेश में व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे। कई शहरों में मीडिया संस्थानों पर हमले हुए, दफ्तरों में आगजनी की गई और सरकारी तंत्र को खुली चुनौती दी गई।
🕯️ कैसे हुई थी उस्मान हादी की हत्या
12 दिसंबर को ढाका के बिजयनगर इलाके में एक चुनावी अभियान के दौरान नकाबपोश बंदूकधारियों ने उस्मान हादी को सिर में गोली मार दी थी। गंभीर रूप से घायल हादी को इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां 19 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ते चले गए।
⚠️ 24 घंटे का अल्टीमेटम, फिर पुलिस की बेबसी
हादी की हत्या के बाद उग्र संगठनों और कट्टरपंथी समूहों ने अंतरिम सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी में ठोस प्रगति की मांग की थी। लेकिन रविवार को पुलिस ने स्वीकार किया कि मुख्य संदिग्धों के ठिकानों को लेकर उसके पास कोई ठोस जानकारी नहीं है, जिससे सरकार की स्थिति और कमजोर हो गई।
🏛️ अंतरिम सरकार पर बढ़ता दबाव
पहले से ही आलोचनाओं में घिरी मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के लिए यह दूसरा हमला बड़ी चुनौती बन सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर स्थिति पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो हिंसा का नया दौर शुरू हो सकता है।
🗣️ शेख हसीना का हमला: यूनुस सरकार पर गंभीर आरोप
इस बीच बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक ईमेल इंटरव्यू में दावा किया कि उनके शासन के बाद देश में अराजकता कई गुना बढ़ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने चरमपंथी तत्वों को सत्ता में जगह दी, दोषी आतंकियों को जेल से रिहा किया और अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से जुड़े समूहों को सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होने दिया।
क्या बांग्लादेश एक और बड़े संकट की ओर?
एक के बाद एक राजनीतिक हत्याएं, पुलिस की नाकामी और सरकार पर बढ़ता दबाव यह संकेत दे रहा है कि बांग्लादेश बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है। अगर इन हमलों के पीछे के नेटवर्क को जल्द बेनकाब नहीं किया गया, तो हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं और देश फिर व्यापक हिंसा की चपेट में आ सकता है।