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अंकिता भंडारी केस: उत्तराखंड बंद कांग्रेस का फ्लॉप शो, व्यापारियों ने जताया कड़ा विरोध – जमीनी हालात उजागर…

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेश में कांग्रेस द्वारा बुलाया गया उत्तराखंड बंद शनिवार को पूरी तरह विफल साबित हुआ। कांग्रेस ने इसे न्याय की आवाज बताया, लेकिन जनता ने इस बंद का साथ नहीं दिया। ज्यादातर शहरों में बाजार खुले रहे और व्यापारियों ने बंद के औचित्य पर ही सवाल उठा दिए।


राजनीतिक मकसद पर उठे सवाल

कांग्रेस ने दावा किया कि बंद राज्यव्यापी सफलता साबित हुआ, लेकिन जमीनी हकीकत उलट रही। अधिकांश शहरों में ट्रैफिक सामान्य रहा, स्कूल और दुकानें चालू रहीं और लोग नियमित गतिविधियों में लगे रहे। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि जब राज्य सरकार पहले ही CBI जांच की संस्तुति दे चुकी थी, तब कांग्रेस का बंद बुलाना “राजनीतिक निर्णय” अधिक दिखा।


CBI जांच की सिफारिश के बाद बंद का औचित्य संदिग्ध

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अंकिता के माता-पिता के अनुरोध पर CBI जांच की सिफारिश कर चुके हैं। कई व्यापारिक व सामाजिक संगठनों ने पहले ही कहा था कि जांच शुरू हो चुकी है, इसलिए बंद का कोई मतलब नहीं बचता। उन्होंने इसे “जनता को परेशान करने का तरीका” बताया।


व्यापारियों का खुला विरोध

देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, चमोली सहित कई शहरों में मार्केट खुले रहे। कई व्यापारियों ने कहा—
“न्याय की लड़ाई सरकार से लड़ो, जनता को परेशान क्यों करते हो?”
कई स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर जबरदस्ती दुकानें बंद करवाने के आरोप लगे, जिसका व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने विरोध किया।


कई जगहों पर नोकझोंक

कुछ जिलों से खबरें आईं कि बंद समर्थकों और व्यापारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसमें व्यापारियों को जोर देकर दुकानें खुली रखने की बात करते देखा गया। कांग्रेस इसे “सफल बंद” बताते रही, जबकि जमीन पर स्थिति बिल्कुल अलग थी।


सीएम धामी ने कहा— न्याय में कोई देरी नहीं

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार ने शुरू से निष्पक्ष और तेज कार्रवाई की। उन्होंने CBI जांच को “न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम” बताया।


क्या है पूरा अंकिता भंडारी मामला?

19 वर्षीय अंकिता भंडारी पौड़ी के यमकेश्वर स्थित वनतारा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थी।
18-19 सितंबर 2022 को वह अचानक गायब हो गई।
23 सितंबर को तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, जिन्होंने पूछताछ में हत्या कबूल की।
24 सितंबर को आरोपियों की निशानदेही पर चील नहर से शव बरामद किया गया।

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