अमेरिका में घटा राष्ट्रीय गर्व का एहसास, लोकतंत्र और इतिहास पर भी कमजोर पड़ा भरोसा
अमेरिका में हुए दो नए सर्वेक्षणों ने देश के सामाजिक और राजनीतिक माहौल की बदलती तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी नागरिकों का अपने देश, लोकतांत्रिक व्यवस्था और इतिहास पर भरोसा पहले की तुलना में कमजोर हुआ है। खासकर युवाओं और डेमोक्रेट समर्थकों में राष्ट्रीय गर्व की भावना में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जबकि रिपब्लिकन समर्थकों में यह भावना अब भी अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।
राष्ट्रीय गर्व के स्तर में आई बड़ी गिरावट
एसोसिएटेड प्रेस-एनओआरसी सेंटर फॉर पब्लिक अफेयर्स रिसर्च और गैलप की ओर से किए गए सर्वेक्षण में सामने आया कि अब केवल 53 प्रतिशत अमेरिकी ही खुद को अमेरिका का नागरिक होने पर “बेहद” या “बहुत अधिक” गर्व महसूस करते हैं। वर्ष 2001 के बाद यह सबसे कम स्तर माना गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते राजनीतिक ध्रुवीकरण, सामाजिक मतभेद और संस्थाओं पर घटते विश्वास ने नागरिकों की सोच को प्रभावित किया है। इसके बावजूद अधिकांश लोग अब भी अमेरिका को अवसरों और स्वतंत्रता का देश मानते हैं।
लोकतांत्रिक व्यवस्था और इतिहास पर भी कम हुआ विश्वास
सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि अमेरिकी लोकतंत्र के कामकाज को लेकर लोगों का भरोसा लगातार कमजोर हुआ है। वर्ष 2017 में जहां 42 प्रतिशत लोग लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गर्व जताते थे, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर 28 प्रतिशत रह गया है। इसी तरह सेना पर गर्व करने वालों की संख्या में 19 प्रतिशत और देश के इतिहास पर गर्व करने वालों में 14 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, इन बदलावों के पीछे राजनीतिक ध्रुवीकरण और अलग-अलग विचारधाराओं के बीच बढ़ती दूरी प्रमुख कारणों में शामिल है।
डेमोक्रेट और रिपब्लिकन समर्थकों की सोच में बड़ा अंतर
गैलप के आंकड़ों के अनुसार, राजनीतिक विचारधारा के आधार पर राष्ट्रीय गर्व की भावना में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। करीब 70 प्रतिशत रिपब्लिकन समर्थकों ने कहा कि उन्हें अमेरिकी होने पर बेहद गर्व है। इसके विपरीत, डेमोक्रेट समर्थकों में यह आंकड़ा केवल 14 प्रतिशत रहा, जबकि निर्दलीय मतदाताओं में 28 प्रतिशत लोगों ने ऐसी भावना व्यक्त की। इससे स्पष्ट होता है कि अमेरिका में राजनीतिक विभाजन केवल चुनावी मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय पहचान और संस्थाओं के प्रति लोगों की सोच पर भी उसका प्रभाव पड़ रहा है।
युवाओं में राष्ट्रीय पहचान का महत्व अपेक्षाकृत कम
सर्वेक्षण के अनुसार, उम्र के आधार पर भी राष्ट्रीय पहचान को लेकर लोगों की सोच में बड़ा अंतर देखने को मिला। 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लगभग तीन-चौथाई लोगों ने अमेरिकी पहचान को बेहद महत्वपूर्ण बताया, जबकि 30 वर्ष से कम उम्र के केवल एक-तिहाई युवाओं ने ऐसा माना। इसके अलावा अश्वेत और हिस्पैनिक समुदाय के कई प्रतिभागियों ने अपनी नस्लीय या सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय पहचान से अधिक महत्वपूर्ण बताया। इससे यह संकेत मिलता है कि नई पीढ़ी की पहचान और प्राथमिकताएं पहले की तुलना में अधिक विविध और बहुआयामी होती जा रही हैं।
स्वतंत्रता और अवसर अब भी गर्व की सबसे बड़ी वजह
हालांकि सर्वेक्षण में राष्ट्रीय गर्व में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन अधिकांश प्रतिभागियों ने यह भी माना कि अमेरिका में उपलब्ध व्यक्तिगत स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और बेहतर अवसर आज भी देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। कई लोगों ने कहा कि चुनौतियों के बावजूद यही मूल्य उन्हें अमेरिका पर गर्व करने का कारण देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में राजनीतिक माहौल, आर्थिक परिस्थितियां और सामाजिक विश्वास यह तय करेंगे कि नागरिकों का राष्ट्रीय गर्व फिर से मजबूत होता है या नहीं।