अलवर: प्याज के नहीं मिल रहे दाम, किसानों ने तीसरी बार नदी में फेंकी प्याज की ट्रॉलियां…
अलवर जिले के राजगढ़ उपखंड के चंदपुरा गांव में एक बार फिर किसानों का आक्रोश प्याज की बोरियों के साथ नदी में बह गया। देर रात एक किसान ने तीसरी बार अपनी प्याज की दो ट्रॉलियां चंदपुरा-पुनखर मार्ग के बीच स्थित नदी में पटक दीं। कारण वही—प्याज के गिरते दाम और लागत पूरी न होना।
स्थानीय किसानों सुरेशचंद मीना और सचिन ने बताया कि किसानों को बाजार में प्याज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। प्याज की पैकिंग और परिवहन में ही भारी खर्चा हो जाता है—120 रुपये मजदूरी कटवाने में, और 30 रुपये एक खाली कट्टे का खर्चा। कुल मिलाकर एक भरा कट्टा 200 रुपये तक पड़ जाता है, जबकि मंडियों में भाव इतने कम हैं कि लागत भी नहीं निकल पा रही।
किसानों का कहना है कि अगर सरकार 10 से 12 रुपये प्रति किलो की दर से खरीद करे, तो कुछ राहत मिल सकती है। अन्यथा किसान मजबूरी में अपनी फसल यूं ही फेंकने को विवश हैं। सुरेशचंद मीना ने कहा, “हमारी मेहनत का कोई मोल नहीं। एक बीघा प्याज में करीब पचास हजार रुपये का खर्च आता है, लेकिन लागत तक नहीं निकल रही। अब किसान रो रहा है, मरने को तैयार है।”
गौरतलब है कि इससे पहले भी 28 अक्टूबर और 5 नवम्बर को कुछ किसानों ने इसी स्थान पर प्याज की ट्रॉलियां नदी में फेंकी थीं। किसानों का आरोप है कि सरकार ने अब तक उनकी समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया है, जिसके चलते खेती घाटे का सौदा बन गई है।
किसान ने बताया मेहनत बहुत लगती है, पर भाव कुछ नहीं मिलता। अब तो प्याज फेंकने के अलावा कोई रास्ता नहीं।” एक अन्य किसान ने कहा सरकार अगर 10-12 रुपये किलो ले तो लागत निकले, नहीं तो किसान यूं ही फसल बर्बाद करता रहेगा।”