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अलवर सेंट्रल जेल में फिर सुरक्षा में सेंध, मोबाइल इस्तेमाल के मामले में विचाराधीन बंदी गिरफ्तार

अलवर सेंट्रल जेल में प्रतिबंधित मोबाइल फोन के इस्तेमाल का एक और मामला सामने आया है। कोतवाली थाना पुलिस ने विचाराधीन बंदी योगेंद्र उर्फ पट्टा को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, बंदी के पास से जेल में मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद हुए थे। आरोप है कि वह जेल के भीतर से परिचितों से बातचीत करता था। मामले में जेल प्रहरियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की कोशिश का आरोप भी सामने आया है। पुलिस अब जांच कर रही है कि मोबाइल और सिम जेल के भीतर कैसे पहुंचे और इसमें अन्य लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं।

मोबाइल और सिम मिलने के मामले में गिरफ्तारी

अलवर सेंट्रल जेल में मोबाइल फोन के अवैध इस्तेमाल को लेकर पुलिस ने कार्रवाई की है। कोतवाली थाना पुलिस ने विचाराधीन बंदी योगेंद्र उर्फ पट्टा को शनिवार को प्रोडक्शन वारंट के तहत गिरफ्तार किया।पुलिस के अनुसार, योगेंद्र ततारपुर थाना क्षेत्र के टेहड़का गांव का निवासी है। जेल में प्रतिबंधित मोबाइल फोन रखने और उसका इस्तेमाल करने के मामले में उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य मोबाइल फोन के स्रोत और जेल के भीतर उसकी पहुंच से जुड़े तथ्यों का पता लगाना है।

24 सितंबर को जेल प्रशासन ने दर्ज कराई थी रिपोर्ट

कोतवाली थाना प्रभारी दिनेश मीणा के अनुसार, 24 सितंबर को सेंट्रल जेल प्रशासन की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि विचाराधीन बंदी योगेंद्र उर्फ पट्टा के पास से मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद हुए थे।शिकायत के अनुसार, तलाशी या कार्रवाई के दौरान बंदी ने जेल प्रहरियों के साथ धक्का-मुक्की की और मारपीट का प्रयास किया। इसके बाद जेल प्रशासन ने पुलिस को मामले की सूचना दी।पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू की। अब बंदी की गिरफ्तारी के बाद मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

जेल के भीतर से परिचितों से करता था बातचीत

पुलिस जांच में सामने आया कि बंदी कथित तौर पर जेल के भीतर से मोबाइल फोन के जरिए अपने परिचितों से बातचीत करता था।अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्रतिबंधित मोबाइल फोन और सिम कार्ड जेल के भीतर कैसे पहुंचे। जांच में यह भी देखा जाएगा कि फोन बंदी तक पहुंचाने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।फिलहाल, मोबाइल की आपूर्ति और उसके इस्तेमाल से जुड़े नेटवर्क के बारे में अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।

दो महीने में मोबाइल इस्तेमाल का दूसरा मामला

जानकारी के अनुसार, पिछले दो महीनों में अलवर सेंट्रल जेल में मोबाइल फोन के इस्तेमाल से जुड़ा यह दूसरा मामला है। लगातार ऐसे मामले सामने आने से जेल की सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंधित सामान की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।जेल परिसर में मोबाइल फोन का अवैध इस्तेमाल सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से गंभीर विषय है। ऐसे में मोबाइल और सिम कार्ड की जेल के भीतर पहुंच की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।हालांकि, इस मामले में सुरक्षा संबंधी चूक किस स्तर पर हुई, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

पुलिस जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

कोतवाली थाना पुलिस बंदी योगेंद्र उर्फ पट्टा से पूछताछ कर रही है। जांच में मोबाइल फोन और सिम कार्ड की उपलब्धता, उनके इस्तेमाल और संभावित सहयोगियों की भूमिका का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।फिलहाल पुलिस के सामने जेल के भीतर मोबाइल पहुंचने के तरीके और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों के जवाब तलाशना अहम है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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Stv News Rajasthan

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