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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस को फटकारा, कहा- इंसान को ‘कब्ज़ा’ में नहीं लिया जा सकता…

इलाहबाद:
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुज़फ्फरनगर के एक मामले में पुलिस की मनमानी पर कड़ी नाराज़गी जताई। कोर्ट ने कहा कि ‘कब्ज़ा’ शब्द संपत्ति के लिए होता है, इंसान के लिए नहीं। पुलिस ने युवती को हिरासत में लेने के बजाय फर्द में लिखा कि वह उसे ‘कब्ज़े में ले रही है’।

⭐ मामला क्या था?

  • एक युवती ने अपने प्रेमी के साथ रहने की इच्छा जताई थी और कोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की।
  • पुलिस ने नाबालिग होने का दावा कर उसे बाल गृह भेज दिया।
  • कोर्ट ने जांच में पाया कि युवती बालिग है और अपनी मर्ज़ी से रहने का फैसला कर सकती है।

⭐ हाई कोर्ट का फैसला

  • पुलिस के फर्द को गलत ठहराया गया।
  • युवती को उसके पति के साथ रहने की अनुमति दी गई।
  • नेशनल कमीशन फ़ॉर विमेन को मामले की जांच और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया गया।

⭐ महत्वपूर्ण बातें

  • कोर्ट ने आधार कार्ड की जन्मतिथि को साक्ष्य के रूप में मान्यता नहीं दी।
  • युवती का हक़ है कि वह अपनी मर्ज़ी से कहीं भी जा सके।
  • पुलिस और प्रशासन को कोर्ट के आदेशों का पालन करना अनिवार्य है।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी इंसान को ‘कब्ज़ा’ में नहीं लिया जा सकता, और युवती की स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा की।

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