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AI सप्लाई चेन पर वैश्विक सहमति, भारत समेत 35 देशों ने अमेरिका की पहल का किया समर्थन

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते वैश्विक प्रभाव के बीच भारत समेत 35 देशों ने विश्वसनीय और सुरक्षित AI सप्लाई चेन विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका की अगुवाई में आयोजित ‘द्वितीय पैक्स सिलिका शिखर सम्मेलन’ में इन देशों ने संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर एआई, सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ मिनरल्स की मजबूत आपूर्ति व्यवस्था बनाने की प्रतिबद्धता जताई।

AI इकोसिस्टम को मजबूत बनाने पर वैश्विक सहमति

वॉशिंगटन में आयोजित द्वितीय पैक्स सिलिका शिखर सम्मेलन के दौरान 35 देशों ने ‘AI अवसर’ संबंधी संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। इस पहल का उद्देश्य ऐसी वैश्विक आपूर्ति शृंखला तैयार करना है, जो एआई तकनीकों के विकास, नवाचार और सुरक्षित उपयोग को मजबूती प्रदान कर सके। सहभागी देशों ने विकासोन्मुखी और नवाचार समर्थक नियामकीय ढांचे को बढ़ावा देने पर भी सहमति व्यक्त की।

भारत की सक्रिय भागीदारी

इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन, विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू और भारतीय उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने किया। भारत की भागीदारी यह दर्शाती है कि देश वैश्विक एआई इकोसिस्टम और तकनीकी सहयोग में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है।

किन देशों ने किया पहल का समर्थन

सम्मेलन के दौरान अर्जेंटीना, जर्मनी, नीदरलैंड्स, चिली, कोस्टा रिका, ग्रीस, कजाखस्तान, पनामा और यूरोपीय संघ सहित कई देशों ने भी पैक्स सिलिका पहल का समर्थन किया। इससे इस अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विभिन्न देशों की साझेदारी भविष्य में तकनीकी आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाएगी।

क्या है पैक्स सिलिका पहल का उद्देश्य?

अमेरिका ने दिसंबर 2025 में पैक्स सिलिका पहल की शुरुआत की थी। इस अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का लक्ष्य एआई, सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ मिनरल्स जैसी रणनीतिक तकनीकों के लिए सुरक्षित, भरोसेमंद और टिकाऊ सप्लाई चेन तैयार करना है। साथ ही निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और आधुनिक तकनीकी अवसंरचना विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

भविष्य की तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अहम कदम

अमेरिका के आर्थिक मामलों के उप मंत्री जैकब हेलबर्ग ने कहा कि यह पहल केवल सप्लाई चेन तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले समय की एआई क्रांति के लिए मजबूत आधार तैयार करने की दिशा में एक वैश्विक प्रयास है। उनका मानना है कि सरकारों और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग से भविष्य की तकनीकी चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना किया जा सकेगा।

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