AI क्रांति पर सियासी संग्राम: डेटा कंट्रोल और ट्रेड डील को लेकर राहुल गांधी का सरकार पर हमला
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश एक बड़े तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रहा है, लेकिन सरकार इस चुनौती और अवसर दोनों को सही दिशा देने में असफल दिखाई दे रही है।
‘एआई क्रांति तूफान की तरह, तैयारी जरूरी’
राहुल गांधी ने कहा कि एआई क्रांति एक तूफान की तरह आ रही है, जो अपने साथ अवसर और खतरे दोनों लेकर आई है। उनके मुताबिक आईटी और सर्विस सेक्टर, जो भारतीय अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ है, इस बदलाव से प्रभावित हो सकता है। यदि समय रहते तैयारी नहीं की गई तो हजारों सॉफ्टवेयर इंजीनियर और प्रोफेशनल्स की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
‘डेटा ही एआई की असली ताकत’
उन्होंने कहा कि डेटा एआई इंजन को चलाने वाला ‘पेट्रोल’ है। भारत की सबसे बड़ी पूंजी उसके 1.4 अरब लोग और उनसे उत्पन्न होने वाला विशाल डेटा है। राहुल गांधी के अनुसार, आने वाला एआई समिट भारत के लिए यह दिखाने का अवसर होना चाहिए कि वह अपने डेटा के आधार पर वैश्विक एआई भविष्य को अपनी शर्तों पर आकार दे सकता है।
ट्रेड डील में डिजिटल डेटा पर समझौते का आरोप
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि डिजिटल ट्रेड में बाधाएं हटाने के नाम पर सरकार ने अमेरिका के दबाव में डेटा कंट्रोल से समझौता किया है। उन्होंने कहा कि बड़ी विदेशी टेक कंपनियां—जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब, अमेजन और एंड्रॉयड—पहले ही भारतीय डेटा पर मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।
‘देश के प्राइम रिसोर्स पर विदेशी दबाव’
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में 1.5 अरब लोगों के डेटा को सुरक्षित रखना, एल्गोरिदम और सोर्स कोड में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और डेटा से होने वाले मुनाफे पर टैक्स लगाना बड़ी चुनौती बन सकता है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारत के प्रमुख संसाधन—डेटा—को विदेशी ताकतों के हवाले करने का दबाव बनाया जा रहा है।
सरकार की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। एआई समिट और प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती नजर आ रही है।
यह मुद्दा आने वाले समय में संसद और सार्वजनिक विमर्श में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।