बिहार के बाद अब ‘मिशन बंगाल’ — बीजेपी का 5 ज़ोन, 5 महीने वाला ‘पांडव प्लान’ तैयार….
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बीजेपी ने अब तक की सबसे आक्रामक चुनावी रणनीति लॉन्च कर दी है। बिहार मॉडल की तर्ज पर पार्टी ने पूरे बंगाल को पाँच जोनों में बांटकर अगले पाँच महीनों में बूथ स्तर तक संगठन को पूरी तरह एक्टिव करने का टारगेट सेट किया है। छह राज्यों से 12 बड़े नेताओं की तैनाती और बूथ नेटवर्क को 75% तक रीऑर्गनाइज़ करने का मिशन—पार्टी इस चुनाव को ‘टर्निंग पॉइंट’ मानकर चल रही है।
बीजेपी का ‘पांडव प्लान’ — बंगाल को पाँच ज़ोन में बांटकर बड़ी तैयारी शुरू**
2026 चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने पश्चिम बंगाल को पाँच प्रमुख जोनों में बाँटा है—
- राढ़बंगा
- हावड़ा–हुगली–मेदिनीपुर
- उत्तर बंगाल
- कोलकाता–दक्षिण 24 परगना
- उत्तर 24 परगना
प्रत्येक ज़ोन में एक-एक संगठन मंत्री और एक वरिष्ठ नेता की तैनाती की गई है, जो लगातार बूथों पर जाकर पन्ना प्रमुख और बूथ टीम को मजबूत करेंगे।
हाई-लेवल टीम तैनात — 6 राज्यों से आए 12 दिग्गज नेता**
बीजेपी ने दूसरे राज्यों से अनुभवी नेताओं को बंगाल भेजकर साफ कर दिया है कि मुकाबला बेहद गंभीर होगा।
- मुख्य चुनाव प्रभारी: भूपेंद्र यादव
- सह-प्रभारी: बिप्लब देब
प्रमुख तैनाती:
- उत्तर बंगाल: नारायण मिश्र (अ-प्रदेश), सुपरविजन – कैलाश चौधरी
- राढ़बंगा: पवन साईं और धन सिंह रावत
- हावड़ा–हुगली: पवन राणा और संजय भाटिया
- मेदिनीपुर: यूपी मंत्री जेपीएस राठौर
- कोलकाता–द. 24 परगना: एम. सिद्धार्थन और सीटी रवि
ये सभी नेता अगले पाँच महीनों तक बंगाल में डेरा डालकर टीएमसी के मजबूत इलाकों में पैठ बनाते रहेंगे।
उत्तर बंगाल — बीजेपी का ‘सुपर जोन’, जहां खेल बदल सकता है**
उत्तर बंगाल पार्टी की रणनीति का केंद्र बिंदु है, क्योंकि:
- यह 54 विधानसभा सीटों को प्रभावित करता है।
- यहां का वोट शेयर राज्य का 20–25% हिस्सा है।
- 2021 में बीजेपी ने यहां 40% से ज्यादा सीटें जीती थीं।
- सीमाई भूगोल (नेपाल, भूटान, बांग्लादेश) इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाता है।
पार्टी का लक्ष्य है कि यहां वोट शेयर 38% से बढ़ाकर 44–45% तक पहुंचाया जाए।
बिहार मॉडल लागू — ‘ग्राम चालो’, हिंदू वोट एकीकरण और वेलफेयर फोकस**
बीजेपी की रणनीति पर बिहार चुनाव की झलक साफ दिखती है।
आने वाले महीनों में:
-ग्राम चालो अभियान**
-हिंदू वोटों का माइक्रो-टार्गेटिंग**
-केंद्र की योजनाओं का व्यापक प्रचार**
-Panna Pramukh और बूथ कमेटियों की रीबिल्डिंग**
इन कार्यक्रमों को लगातार चलाया जाएगा, ताकि जमीनी नेटवर्क नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 तक एक्टिव मोड में रहे।
बड़े चेहरे मैदान में — दिसंबर से मोदी–शाह की मेगा रैलियाँ**
दिसंबर से पूरे बंगाल में चुनावी माहौल बनाने के लिए:
- पीएम नरेंद्र मोदी
- गृहमंत्री अमित शाह
- और कई केंद्रीय मंत्री
लगातार रैलियाँ, रोड शो और जनसभाएं करेंगे। चुनाव अभियान को केंद्र स्तर से हाई-वोल्टेज सपोर्ट मिलेगा।
बूथ मजबूत, वोट शेयर में 5–7% की बढ़ोतरी**
बीजेपी का मुख्य फोकस है:
-75% बूथ प्रमुखों की नियुक्ति पूरी करना**
-वोट शेयर में कम से कम 5–7% की बढ़ोतरी करना**
पार्टी को भरोसा है कि एक संगठित बूथ नेटवर्क और हाई लेवल तैनाती से टीएमसी के किलों में सेंध लगाई जा सकती है।
बंगाल में चुनावी जंग का बिगुल बज चुका है**
बीजेपी का पांच महीने का ‘मिशन बंगाल’ साफ संकेत देता है कि यह मुकाबला सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा की लड़ाई है।
टीएमसी को चुनौती देने के लिए पार्टी बूथ से लेकर टॉप लेवल तक युद्धस्तर की तैयारी कर चुकी है।
2026 का चुनाव बंगाल की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।