रेप केस में FIR रद्द करने की मांग: अभिनेता आदित्य पंचोली पहुंचे बॉम्बे हाईकोर्ट, अगली सुनवाई 4 मार्च को
बॉलीवुड अभिनेता आदित्य पंचोली से जुड़े कथित बलात्कार मामले में दर्ज FIR को रद्द कराने की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। यह मामले की 28वीं सुनवाई थी, जिसमें कोर्ट ने अगली तारीख 4 मार्च तय करते हुए शिकायतकर्ता को दोबारा नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
🟡 7 साल पुराने केस में FIR रद्द करने की मांग
अभिनेता की ओर से दायर याचिका में वर्ष 2019 में मुंबई के वर्सोवा पुलिस स्टेशन में दर्ज दुष्कर्म (IPC 376 सहित अन्य धाराओं) की FIR को निरस्त करने की मांग की गई है। आरोपी पक्ष का दावा है कि मामला तथ्यात्मक रूप से कमजोर है और इसे कानूनी रूप से रद्द किया जाना चाहिए।
🟡 कोर्ट में क्या हुआ आज?
सुनवाई के दौरान आदित्य पंचोली स्वयं हाईकोर्ट पहुंचे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मामला न्यायालय में लंबित है और आगे क्या होगा, इसका फैसला अगली सुनवाई में स्पष्ट होगा।
उनके वकील प्रशांत पाटिल ने कोर्ट में FIR रद्द करने की मांग दोहराई।
🟡 पुलिस का पक्ष: पीड़िता जांच में शामिल नहीं
सरकारी पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि पुलिस द्वारा शिकायतकर्ता को अब तक 11 नोटिस भेजे जा चुके हैं, लेकिन वह जांच प्रक्रिया में शामिल नहीं हुईं। इस पर हाईकोर्ट ने एक बार फिर नोटिस जारी कर अगली तारीख पर उपस्थित होने के निर्देश दिए।
🟡 शिकायतकर्ता अभिनेत्री, मामला बना विवादित
इस केस में शिकायतकर्ता एक महिला अभिनेत्री हैं, जिन्होंने 27 जून 2019 को शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपी पक्ष का कहना है कि कथित घटना के लगभग 15 वर्ष बाद FIR दर्ज कराई गई, जिससे मामले की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
🟡 सुप्रीम कोर्ट के ‘भजनलाल’ फैसले का हवाला
बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित State of Haryana vs Bhajan Lal फैसले का हवाला देते हुए कहा कि दुर्भावनापूर्ण या कानूनी आधार कमजोर होने पर FIR रद्द की जा सकती है।
वकील के अनुसार, FIR दर्ज होने से पहले हुई एक कथित बातचीत की रिकॉर्डिंग भी अदालत में पेश की गई है, जिसे बचाव पक्ष अपने पक्ष के समर्थन में महत्वपूर्ण सबूत बता रहा है।
🟡 शिकायतकर्ता पक्ष ने मांगा समय
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत से समय मांगा ताकि वह अपने मुवक्किल से निर्देश लेकर विस्तृत जवाब दाखिल कर सके। कोर्ट ने अनुरोध स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 4 मार्च को निर्धारित कर दी।
🟡 फिलहाल मामला न्यायालय में लंबित
मामला अभी विचाराधीन है और अदालत में दोनों पक्षों की दलीलों के बाद ही आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी। हाईकोर्ट के अंतिम आदेश पर ही तय होगा कि FIR जारी रहेगी या रद्द की जाएगी।
🟡 कानूनी लड़ाई का अहम मोड़
यह मामला अब प्रक्रिया संबंधी कानूनी बहस के चरण में पहुंच चुका है।
- FIR की वैधता बनाम देरी से शिकायत का मुद्दा
- जांच में सहयोग का सवाल
- सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों की व्याख्या
आने वाली सुनवाई इस केस की दिशा तय कर सकती है।