CEPA Explained: भारत–ओमान फ्री ट्रेड डील से खुलेगा अरबों डॉलर का बाजार, क्यों बेचैन होंगे पाकिस्तान जैसे देश?
भारत ने वैश्विक ट्रेड मैप पर एक और बड़ी चाल चल दी है। भारत और ओमान के बीच हुए CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) से भारतीय निर्यातकों को लगभग पूरा ओमानी बाजार ड्यूटी-फ्री मिलने वाला है। यह डील सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि रोजगार, MSME, कृषि और एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़ा एक रणनीतिक समझौता मानी जा रही है।
📌 क्या है भारत–ओमान CEPA?
CEPA यानी Comprehensive Economic Partnership Agreement एक ऐसा फ्री ट्रेड समझौता है, जिसके तहत दोनों देश आयात-निर्यात शुल्क कम या खत्म करते हैं। इस समझौते पर 18 दिसंबर को हस्ताक्षर हुए और दोनों सरकारें इसे जल्द लागू करने की दिशा में काम कर रही हैं।
📌 कब से लागू हो सकता है समझौता?
सरकारी संकेतों के मुताबिक, कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होते ही यह डील तीन महीने के भीतर लागू हो सकती है। यानी वित्त वर्ष 2025 की शुरुआत से भारतीय कंपनियों को इसका सीधा फायदा मिलने की संभावना है।
📌 ओमान ने भारत के लिए कितना बड़ा बाजार खोला?
इस CEPA के तहत ओमान ने अपनी 98.08% टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क की पेशकश की है।
- इससे भारत के 99.38% निर्यात को ओमान में ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी
- अभी इन उत्पादों पर 5% से 100% तक टैक्स लगता था
- FY25 में ओमान को भारत का निर्यात 4.1 बिलियन डॉलर रहा
📌 किन राज्यों और उद्योगों को सबसे ज्यादा फायदा?
यह डील खास तौर पर लेबर-इंटेंसिव और MSME सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
मुख्य लाभार्थी क्षेत्र:
- सूरत (गुजरात): रत्न और आभूषण
- पुणे (महाराष्ट्र): इंजीनियरिंग उत्पाद
- तिरुपुर (तमिलनाडु): रेडीमेड गारमेंट्स
- विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश): समुद्री उत्पाद
- मुरादाबाद (UP): पीतल व धातु हस्तशिल्प
- कानपुर–आगरा (UP): लेदर फुटवियर
- भदोही–मिर्जापुर (UP): कालीन व होम टेक्सटाइल
- वेल्लोर–अंबूर (तमिलनाडु): फुटवियर
📌 IT और सर्विस सेक्टर को कैसे मिलेगा फायदा?
कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना के IT और IT-Enabled Services प्रोफेशनल्स को ओमान में नए अवसर मिलेंगे।
इसके अलावा इन सेक्टर्स में भी निर्यात बढ़ेगा:
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- बिजनेस और प्रोफेशनल सर्विस
- रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D)
📌 किसानों और कृषि आधारित उद्योगों के लिए क्या बदलेगा?
CEPA से कृषि निर्यात को भी मजबूत सपोर्ट मिलेगा।
राज्य-वार लाभ:
- मीट/लाइवस्टॉक: UP, पंजाब, हरियाणा, आंध्र, महाराष्ट्र
- अंडा निर्यात: तमिलनाडु, आंध्र, तेलंगाना, महाराष्ट्र
- बिस्कुट: पंजाब, UP, आंध्र, तेलंगाना
- कन्फेक्शनरी: कर्नाटक, UP, महाराष्ट्र
- शहद: पंजाब, हरियाणा, UP, राजस्थान, बंगाल, नॉर्थ-ईस्ट
📌 किन उत्पादों को भारत ने छूट से बाहर रखा?
घरेलू किसानों और MSME की सुरक्षा के लिए भारत ने कुछ संवेदनशील उत्पादों पर ड्यूटी छूट नहीं दी है, जिनमें शामिल हैं:
- डेयरी उत्पाद
- चाय, कॉफी, रबर, तंबाकू
- सोना-चांदी (बुलियन व ज्वैलरी)
- फुटवियर, खेल सामान
- कुछ बेस मेटल स्क्रैप
📌 टैरिफ रेट कोटा (TRQ) का क्या मतलब है?
कुछ उत्पादों पर कोटा आधारित ड्यूटी छूट दी जाएगी।
- खजूर: सालाना 2,000 टन ड्यूटी-फ्री
- संगमरमर और पेट्रोकेमिकल्स पर भी सीमित छूट
- ओमान से मार्बल ब्लॉक आयात की अनुमति
📌 भारत और ओमान—दोनों को कैसे होगा फायदा?
बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार:
- भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी
- MSME सेक्टर को नया अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेगा
- एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी
- तेल आयात लागत घटाने में मदद मिलेगी
मुख्य आंकड़े:
- भारत ने ओमान को 77.79% टैरिफ लाइनों पर जीरो-ड्यूटी दी
- ओमान को भारत के 94.81% इंपोर्ट वैल्यू पर फायदा
- CEPA कवर करता है भारत के कुल एक्सपोर्ट बास्केट का लगभग 39%
क्यों रणनीतिक है भारत–ओमान CEPA?
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक स्तर पर टैरिफ वॉर और सप्लाई चेन शिफ्ट हो रही है। अमेरिका जैसे बाजारों में बढ़ते टैक्स के बीच भारत के लिए ओमान एक भरोसेमंद री-रूट और लॉन्ग-टर्म पार्टनर बनकर उभरा है—जो पाकिस्तान जैसे देशों के लिए साफ संदेश भी है।