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मेसी इवेंट विवाद ने लिया कानूनी रूप, सौरव गांगुली ने ठोका ₹50 करोड़ का मानहानि मुकदमा…..

कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुए लियोनेल मेसी से जुड़े बहुचर्चित इवेंट की गूंज अब खेल मैदान से निकलकर अदालत तक पहुंच गई है। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने अपने नाम को विवाद में घसीटे जाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए ₹50 करोड़ का मानहानि केस दर्ज कराया है। गांगुली का कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे, दुर्भावनापूर्ण और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले हैं।


कोलकाता से कोर्ट तक पहुंचा विवाद

मेसी इवेंट को लेकर उपजे विवाद ने उस वक्त नया मोड़ ले लिया, जब सौरव गांगुली ने कानूनी कार्रवाई का फैसला किया। गांगुली ने कोलकाता के लालबाजार थाने में अर्जेंटीना फैन क्लब के अध्यक्ष उत्तम साहा के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कार्यक्रम में हुई अव्यवस्था के लिए जानबूझकर उनका नाम उछाला गया।


किस आधार पर दर्ज हुआ मानहानि केस

सौरव गांगुली का कहना है कि सॉल्ट लेक स्टेडियम में आयोजित इवेंट की व्यवस्थाओं से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। इसके बावजूद उन्हें सार्वजनिक मंचों और मीडिया में जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की गई। गांगुली ने इसे छवि धूमिल करने की साजिश करार दिया है और कहा है कि ऐसे आरोपों से उनकी वर्षों की मेहनत से बनी साख को नुकसान पहुंचा है।


‘सोची-समझी रणनीति के तहत बदनाम करने की कोशिश’

शिकायत में गांगुली ने आरोप लगाया है कि उत्तम साहा द्वारा लगातार आधारहीन, अपमानजनक और भ्रामक बयान दिए गए। ये बयान न सिर्फ व्यक्तिगत मानहानि के दायरे में आते हैं, बल्कि एक सार्वजनिक व्यक्ति के रूप में उनकी सामाजिक और पेशेवर प्रतिष्ठा को भी प्रभावित करते हैं। गांगुली ने इसे जानबूझकर की गई बदनामी की कोशिश बताया है।


मेसी इवेंट में क्या हुआ था

लियोनेल मेसी से जुड़े इस कार्यक्रम को लेकर सॉल्ट लेक स्टेडियम में भारी भीड़ जुटी थी। आयोजन के दौरान अव्यवस्थाएं सामने आईं, जिस पर सवाल खड़े हुए। बाद में इस पूरे घटनाक्रम से सौरव गांगुली का नाम जोड़ा गया, जबकि वे केवल आमंत्रित अतिथि के रूप में कार्यक्रम से जुड़े थे, न कि आयोजक या प्रबंधन टीम का हिस्सा।


₹50 करोड़ का दावा और कानूनी नोटिस

गांगुली ने पहले संबंधित पक्ष को कानूनी नोटिस भेजा था। संतोषजनक जवाब न मिलने के बाद उन्होंने ₹50 करोड़ के हर्जाने की मांग के साथ मानहानि मुकदमा दायर किया। उनका कहना है कि बिना तथ्यों के लगाए गए आरोपों से उन्हें मानसिक, सामाजिक और पेशेवर नुकसान हुआ है।


प्रतिष्ठा की रक्षा का सख्त संदेश

इस कानूनी कदम को सौरव गांगुली की ओर से एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि वे अपने नाम और सम्मान से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे। क्रिकेटर से प्रशासक तक का सफर तय कर चुके गांगुली ने यह दिखा दिया है कि सार्वजनिक जीवन में झूठे आरोपों के खिलाफ वे कानूनी रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे।


अब सबकी निगाहें अदालत पर

अब यह मामला अदालत में विचाराधीन होगा। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कोर्ट इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है। फिलहाल, यह केस खेल आयोजनों, इवेंट मैनेजमेंट और सार्वजनिक व्यक्तित्वों की जवाबदेही से जुड़े मामलों में एक अहम उदाहरण बनता नजर आ रहा है।

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