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‘सरदार, मैंने आपका नमक खाया है…’ से पहले कालिया ने खाई थी घोड़े की लात! जानिए कैसे शूट हुआ ‘शोले’ का यादगार सीन

छोटा किरदार, लेकिन अमर पहचान

हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे रहे, जिनके रोल भले ही सीमित थे, लेकिन उनकी छाप हमेशा के लिए अमिट बन गई। विजू खोटे उन्हीं में से एक थे। कभी खतरनाक डाकू, तो कभी मासूम-सा कॉमेडियन — उनकी स्क्रीन प्रेज़ेंस ऐसी थी कि कुछ सेकंड में ही दर्शकों का ध्यान खींच लेती थी।


फिल्मी परिवार से था नाता

विजू खोटे का जन्म 17 दिसंबर 1941 को मुंबई में हुआ। उनका असली नाम विट्ठल बापुराव खोटे था।

  • पिता नंदू खोटे स्टेज और साइलेंट फिल्मों के जाने-माने अभिनेता थे
  • बहन शुभा खोटे हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री रहीं

दिलचस्प बात यह है कि विजू खोटे पढ़ाई में भी तेज थे और एक समय उन्होंने अभिनय छोड़कर प्रिंटिंग प्रेस तक चला डाला।


चाइल्ड आर्टिस्ट से कैरेक्टर एक्टर तक

उन्होंने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट करियर शुरू किया और फिर धीरे-धीरे फिल्मों में छोटे लेकिन प्रभावशाली रोल करते चले गए।
‘अनोखी रात’, ‘जीने की राह’, ‘खिलौना’, ‘सच्चा झूठा’, ‘रामपुर का लक्ष्मण’, ‘जुर्म और सजा’ जैसी कई फिल्मों में उनकी टाइमिंग और एक्सप्रेशन दर्शकों को खूब भाए।


‘शोले’ ने बदल दी किस्मत

साल 1975 में आई ‘शोले’ विजू खोटे के करियर का टर्निंग पॉइंट बनी।
उन्होंने गब्बर सिंह के साथी कालिया का किरदार निभाया, और डायलॉग —

“सरदार, मैंने आपका नमक खाया है”

इतना लोकप्रिय हुआ कि यह लाइन आज भी सिनेमा इतिहास का हिस्सा मानी जाती है।


कालिया कैसे बने विजू खोटे?

गब्बर सिंह का किरदार निभाने वाले अमजद खान विजू खोटे के थिएटर के पुराने दोस्त थे। उन्हीं की सिफारिश पर उन्हें कालिया का रोल मिला — और बाकी इतिहास बन गया।


जब शूटिंग में पड़ गई घोड़े की मार

‘शोले’ की शूटिंग से जुड़ा एक किस्सा आज भी फिल्म यूनिट के लोग याद करते हैं।
एक सीन में विजू खोटे को घोड़े पर बैठना था। जैसे ही सेट पर स्पॉटबॉय छाता खोलता, घोड़ा भड़क जाता और—

➡️ विजू खोटे जमीन पर गिर पड़ते

यह हादसा एक-दो नहीं, कई बार हुआ

यूनिट के लिए यह नज़ारा मज़ेदार था, लेकिन विजू खोटे के लिए यह बेहद दर्दनाक और चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद उन्होंने बिना शिकायत सीन पूरा किया — यही थी उनकी प्रोफेशनल ईमानदारी।

‘गलती से मिस्टेक हो गया’ से नई पीढ़ी तक पहचान

‘शोले’ के बाद विजू खोटे ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
उन्होंने 440 से ज्यादा हिंदी और मराठी फिल्मों में काम किया।
1994 में आई ‘अंदाज अपना अपना’ में उनका किरदार रॉबर्ट और डायलॉग —

“गलती से मिस्टेक हो गया”

ने उन्हें नई पीढ़ी का फेवरेट बना दिया।


टीवी और मराठी सिनेमा में भी सक्रिय

विजू खोटे ने टीवी पर भी अपनी छाप छोड़ी —

  • ‘जबान संभाल के’
  • ‘श्रीमान श्रीमती’
  • ‘घर जमाई’
  • ‘CID’

मराठी सिनेमा में भी वे ‘उत्तारायण’ जैसी गंभीर फिल्मों का हिस्सा रहे।


एक सादा कलाकार, जो हमेशा याद रहेगा

30 सितंबर 2019 को 77 वर्ष की उम्र में विजू खोटे का मुंबई में निधन हो गया।
उनके जाने से हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसने साबित किया कि—

रोल छोटा हो सकता है, लेकिन अभिनय कभी छोटा नहीं होता।

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