2017 रिश्वत कांड में किशनगढ़ बास थाने का एएसआई दोषी, ACB कोर्ट ने सुनाई 4 साल की सजा
अलवर की एसीबी कोर्ट के न्यायाधीश अनु चौधरी ने वर्ष 2017 के रिश्वतखोरी मामले में किशनगढ़ बास थाने में तैनात रहे एएसआई यादराम को दोषी करार देते हुए चार साल की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर ₹10,000 का जुर्माना भी लगाया है।
सरकारी वकील जसवंत सिंह चौहान ने बताया कि इस मामले में परिवादी नवाब ने 23 मार्च 2017 को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, नवाब के बेटे अब्दुल सहित तीन युवकों के बीच आपसी विवाद हुआ था, जिसका मामला किशनगढ़ बास थाने में दर्ज किया गया था। इस घटना में केवल अब्दुल को ही चोटें आई थीं।
आरोप है कि मामले की जांच कर रहे एएसआई यादराम ने नवाब के बेटे का नाम मुकदमे से हटाने के बदले ₹20,000 की रिश्वत मांगी थी। बाद में सौदा ₹15,000 में तय हुआ, जिसमें से आरोपी पहले ही ₹5,000 ले चुका था।
शिकायत के आधार पर ACB टीम ने जाल बिछाया और एएसआई यादराम को ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान ACB टीम को देखकर आरोपी थाने की दीवार कूदकर भागने लगा, लेकिन करीब एक किलोमीटर तक पीछा करने के बाद टीम ने उसे पकड़ लिया।
बताया गया कि आरोपी एएसआई यादराम एमआईए थाना क्षेत्र के मीणापुरा गांव का रहने वाला है और उस समय किशनगढ़ बास थाने में तैनात था। अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।