Association Election के बाद जंग जैसे हालात, जोधपुर में दफ्तर बंद, माहौल तनावपूर्ण…
राजस्थान के जोधपुर में एक एसोसिएशन के चुनाव परिणाम सामने आते ही हालात बिगड़ गए। जीत-हार के बाद उपजा विवाद अब उपद्रव में तब्दील हो चुका है। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि बीते दो दिनों से एसोसिएशन के कार्यालयों पर ताले लटके हुए हैं और प्रशासन हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए है।
चुनाव परिणाम के बाद बढ़ा विवाद
जोधपुर में हाल ही में हुए एसोसिएशन चुनाव के नतीजों ने संगठन के भीतर गहरी खाई पैदा कर दी है। चुनाव परिणाम घोषित होते ही पराजित गुट ने निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि मामला खुले टकराव और उपद्रव तक पहुंच गया।
दो दिन से बंद पड़े एसोसिएशन कार्यालय
तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए एसोसिएशन के कार्यालयों को बंद कर दिया गया है। पिछले दो दिनों से ताले नहीं खुल पाए हैं, जिससे संगठन से जुड़े दैनिक कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। सदस्य और कर्मचारी असमंजस की स्थिति में हैं और कार्यालयों के बाहर सन्नाटा पसरा हुआ है।
उपद्रव और नारेबाज़ी से बिगड़े हालात
चुनाव परिणाम से नाराज़ गुट के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें नारेबाज़ी और धक्का-मुक्की की घटनाएं भी सामने आईं। कुछ जगहों पर संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की भी सूचना है। हालांकि, समय रहते पुलिस की मौजूदगी से बड़ा टकराव टल गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासन का कहना है कि शांति भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एसोसिएशन की कार्यप्रणाली और आंतरिक लोकतंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि अगर समय रहते आपसी संवाद और पारदर्शिता नहीं अपनाई गई, तो संगठन की साख को लंबे समय तक नुकसान हो सकता है।
सुलह की कोशिशें, लेकिन समाधान अधूरा
बताया जा रहा है कि कुछ वरिष्ठ सदस्य और मध्यस्थ दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, फिलहाल कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। जब तक विवाद सुलझता नहीं, तब तक कार्यालयों के खुलने की संभावना भी कम नजर आ रही है।
जोधपुर में एसोसिएशन चुनाव के बाद उपजा यह विवाद केवल एक संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हार-जीत को स्वीकार न करने की मानसिकता किस तरह हालात बिगाड़ सकती है। अब सभी की नजरें प्रशासन की कार्रवाई और एसोसिएशन के भीतर होने वाले समाधान पर टिकी हैं।