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EVM पर विपक्ष में फूट! लोकसभा में सुप्रिया सुले का बयान, कांग्रेस के आरोपों से बनाई दूरी…

नई दिल्ली

ईवीएम को लेकर कांग्रेस के लगातार आरोपों के बीच लोकसभा में उस वक्त बड़ा सियासी मोड़ देखने को मिला, जब एनसीपी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने ईवीएम और वीवीपैट पर सवाल उठाने से साफ इनकार कर दिया। उनके बयान को कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि यह मुद्दा विपक्षी एकजुटता की कसौटी बना हुआ है।


लोकसभा में साफ संदेश: “इसी मशीन से चुनकर आई हूं”

चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान सुप्रिया सुले ने सदन में कहा,
“मैं इसी मशीन से चुनकर आई हूं, इसलिए मैं EVM या VVPAT पर सवाल नहीं उठाऊंगी।”
उनके इस बयान से यह स्पष्ट हो गया कि विपक्ष के भीतर ईवीएम को लेकर एकराय नहीं है।


कांग्रेस का रुख: EVM पर लगातार हमलावर

कांग्रेस लंबे समय से ईवीएम में गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोप लगाती रही है। पार्टी का दावा है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इसी वजह से वह ईवीएम और वीवीपैट को लेकर सवाल उठा रही है।


राहुल गांधी के आरोप: “वोट चोरी हुई है”

कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले ही भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगा चुके हैं। उनका कहना है कि
“वोट चोरी हुई है और बीजेपी ने ईवीएम के जरिए चुनाव जीता।”
राहुल के इन बयानों ने ईवीएम विवाद को और तेज कर दिया है।


उमर अब्दुल्ला भी कांग्रेस से अलग

ईवीएम मुद्दे पर कांग्रेस को पहले ही झटका लग चुका है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने इस विवाद से खुद को अलग करते हुए कहा था कि
“वोट चोरी कांग्रेस का एजेंडा है, इसका INDIA गठबंधन से कोई संबंध नहीं है।”
इस बयान के बाद विपक्षी खेमे में दरार और गहरी हो गई।


अमित शाह का पलटवार: राजीव गांधी का दिलाया याद

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि
ईवीएम को देश में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में शुरू किया गया था।
उन्होंने यह भी कहा कि ईवीएम से हुए शुरुआती चुनावों में कांग्रेस को ही जीत मिली थी।


2004 बनाम 2014 का हवाला

अमित शाह ने कहा,
“2004 में ईवीएम से चुनाव हुए और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। तब किसी ने सवाल नहीं उठाया। लेकिन 2014 में बीजेपी की जीत के बाद संदेह जताया जाने लगा।”
इस बयान के जरिए शाह ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक बताया।


विपक्ष में खुली असहमति: एक मंच, कई सुर

सुप्रिया सुले और उमर अब्दुल्ला के बयानों से साफ है कि
ईवीएम को लेकर विपक्षी दलों के बीच एक जैसी सोच नहीं है
जहां कांग्रेस इस मुद्दे को आक्रामक रूप से उठा रही है, वहीं उसके सहयोगी दल इससे दूरी बनाते नजर आ रहे हैं।


Analysis: क्यों अहम है सुप्रिया सुले का बयान

  • विपक्षी एकता पर सवाल
  • कांग्रेस के ईवीएम नैरेटिव को झटका
  • INDIA गठबंधन के भीतर मतभेद उजागर
  • आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक संकेत
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