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सरिस्का टाइगर रिज़र्व में उच्चस्तरीय समीक्षा: संरक्षण मॉडल को नई दिशा, 50 बाघों के साथ बढ़ी चुनौतियों पर गहन मंथन

अलवर के सरिस्का टाइगर रिज़र्व में संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों की दिशा में गुरुवार का दिन बेहद अहम रहा। वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरुण कुमार ने सरिस्का परियोजना का दौरा कर व्यापक समीक्षा की। अधिकारियों ने टाइगर सफारी रूट्स, चौकियों, ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग सिस्टम से लेकर नए CTH क्षेत्रों तक का जमीनी निरीक्षण किया।

इससे पहले आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में वन एवं विकास कार्यों, डेवलपमेंट विलेज रिलोकेशन, अरावली प्रकरण और CTH पुनर्निर्धारण जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में जिला कलेक्टर डॉ. अर्तिका शुक्ला, पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी, जिला परिषद CEO गौरव शालूखे, सरिस्का CCF संग्राम सिंह, DFO अभिमन्यु सहारण सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

आपको बता दे सरिस्का में बाघों की संख्या अब 50 के पार पहुंच चुकी है, जिनमें कई टाइग्रेस और उनके शावक भी शामिल हैं। यह उपलब्धि सरिस्का की सफलता को दर्शाती है, लेकिन इसके साथ ही संरक्षण चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं। प्रमुख समस्याओं में CTH सीमाओं से जुड़े विवाद, गांवों का अधूरा पुनर्वास, घासभूमियों की कमी, मानव-वन्यजीव संघर्ष, खनन दबाव और मॉनिटरिंग तंत्र की कमजोरियां शामिल हैं।

अधिकारियों ने सभी मुद्दों का स्थल निरीक्षण कर इन्हें दूर करने के लिए व्यापक सुधार योजना की आवश्यकता पर सहमति जताई। अगले चरण में ग्रासलैंड विकास, रिलोकेशन प्रक्रिया में तेजी और सशक्त सुरक्षा–मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करना महत्वपूर्ण कदम होंगे।

उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि सरिस्का में संरक्षण मॉडल को नई दिशा मिलेगी और बाघों के बढ़ते कुनबे के साथ सुरक्षा और प्रबंधन और मजबूत होगा।

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