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Rajasthan Politics: किरोड़ी लाल मीणा बोले — “अब आमागढ़ नहीं चढ़ सकता… एक-दो साल में रिटायर हो जाऊंगा!” | क्या है असली मतलब?

राजस्थान की सियासत में अपनी तेज तर्रार छवि के लिए जाने जाने वाले कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का नया बयान खूब चर्चा में है। दौसा में उन्होंने कहा —

“मैं एक-दो साल में राजनीति से रिटायर हो जाऊंगा… अब आमागढ़ की पहाड़ी भी नहीं चढ़ पाता।”

यह बयान जैसे ही सामने आया, राजनीति में हलचल बढ़ गई।


📌 किरोड़ी ने रिटायरमेंट की बात क्यों कही?

मीडिया ने सवाल पूछे तो किरोड़ी मीणा ने सफाई दी —

“मैंने ये बात इसलिए कही, क्योंकि पार्टी युवा नेताओं को आगे ला रही है। मेरा पूरा बयान पढ़ो… आधा उठाओगे तो गलत हो जाएगा।”

उन्होंने उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा का उदाहरण देते हुए कहा—

“मैं 6 बार जीता हूं, लेकिन युवा बैरवा को मौका मिला… नई टीम आनी चाहिए।”


📌 “शरीर अब साथ नहीं देता” — आमागढ़ का जिक्र क्यों?

जब उनसे पूछा गया कि ये इच्छा है या मजबूरी, तो उन्होंने साफ कहा—

“शरीर साथ नहीं देगा तो एक समय आएगा ही।”

और फिर वह प्रतीकात्मक लाइन:

“पहले आमागढ़ चढ़ जाता था, अब नहीं चढ़ सकता।”

आमागढ़ पहाड़ी केवल एक जगह नहीं, बल्कि मीणा समाज के आंदोलनों का प्रतीक है। उनका यह कहना कि अब वह वहां तक नहीं चढ़ पाते—
एक आंदोलनकारी नेता की *थकान, **मुकाम, और *सीमाएँ साफ बयान करता है।


📌 सियासी मायने क्या हैं?

मीणा का यह बयान सिर्फ शारीरिक कमजोरी का इशारा नहीं है। इसके पीछे कई संकेत छिपे हुए हैं:

  • पार्टी में युवा नेतृत्व को बढ़ावा
  • खुद को धीरे-धीरे साइड करने की मानसिक तैयारी
  • बढ़ती उम्र और लंबे संघर्ष की थकान का इज़हार
  • समर्थकों में भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखना

राजनीति में उनकी छवि “जुझारू और आंदोलनकारी” रही है।
रिटायरमेंट की बात ने इस छवि को और भावनात्मक बना दिया है

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