भारत-पाकिस्तान रिश्तों में नई तकरार: कश्मीर के बाद अब अरुणाचल और तालिबान पर भी टकराव तेज
भारत–पाकिस्तान के रिश्ते पहले से ही संवेदनशील मोड़ पर थे, लेकिन हाल की घटनाओं ने तनाव को और बढ़ा दिया है। जहां पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की पुरानी रणनीति दोहराता आया है, वहीं अब उसने अरुणाचल प्रदेश पर भी अप्रत्याशित हस्तक्षेप शुरू कर दिया है। चीन के समर्थन में दिया गया पाकिस्तान का आधिकारिक बयान भारत के लिए सीधी चुनौती माना जा रहा है। इसके जवाब में भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफगानिस्तान मुद्दे पर चर्चा के दौरान बिना नाम लिए पाकिस्तान पर तीखा प्रहार किया और तालिबान को लेकर उसकी खुली पैरवी पर सवाल उठाए।
यह पूरा घटनाक्रम संकेत देता है कि दक्षिण एशिया का भू-राजनीतिक समीकरण एक बार फिर से बदल रहा है।
कश्मीर से आगे बढ़ा पाकिस्तान—अब अरुणाचल मुद्दे में भी दखल
पाकिस्तान अब केवल कश्मीर तक सीमित रहने की नीति से आगे बढ़ चुका है। हाल ही में इस्लामाबाद ने आधिकारिक बयान जारी कर अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावे का समर्थन किया। पाकिस्तान की यह नई रणनीति भारत को दो मोर्चों पर घेरने की कोशिश के रूप में समझी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन–पाकिस्तान गठजोड़ भारत पर दबाव बनाने की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है। अरुणाचल जैसे संवेदनशील विषय पर पाकिस्तान का बयान न केवल कूटनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन है, बल्कि यह उसके क्षेत्रीय एजेंडा के विस्तार को भी दर्शाता है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत का पलटवार—बिना नाम लिए पाकिस्तान पर तीखा हमला
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति पर हो रही चर्चा के दौरान भारत ने तल्खी भरा रुख दिखाया। भारत ने कहा कि अफगानिस्तान को स्थिरता की जरूरत है, न कि ऐसे देशों की जो चरमपंथी समूहों को वैधानिकता प्रदान करने की कोशिश कर रहे हों।
हालांकि नाम नहीं लिया गया, लेकिन भारत का संकेत स्पष्ट रूप से पाकिस्तान की ओर था, जो तालिबान सरकार का मुखर समर्थन करता रहा है। भारत ने मल्टीपल मुद्दों पर पाकिस्तान की दोहरी नीति और चरमपंथ को संरक्षण देने वाले रवैये को अप्रत्यक्ष रूप से कठघरे में खड़ा किया।
तालिबान पर पाकिस्तान की खुली पैरवी—भारत ने बताया ‘क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण’
तालिबान शासन को लेकर पाकिस्तान की खुलकर की गई पैरवी भारत और वैश्विक समुदाय को चिंतित करती है। भारत ने यूएन में इस बात पर जोर दिया कि ऐसे तत्व, जो चरमपंथ को बढ़ावा देते हैं, दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।
भारत ने यह भी रेखांकित किया कि अफगानिस्तान की जमीन किसी भी देश पर हमले या आतंकी ढांचे के लिए इस्तेमाल नहीं होनी चाहिए, और इसके लिए पड़ोसी देशों की जिम्मेदारी सबसे अधिक है। यह टिप्पणी सीधे तौर पर पाकिस्तान–तालिबान संबंधों पर उंगली उठाती है।
बदलता भू-राजनीतिक परिदृश्य—भारत की रणनीतिक चेतावनी स्पष्ट
भारत का संदेश बेहद साफ है—क्षेत्रीय स्थिरता किसी भी देश के राजनीतिक एजेंडे या ‘स्ट्रैटेजिक डेप्थ’ की भेंट नहीं चढ़ सकती। पाकिस्तान द्वारा चीन के साथ मिलकर नए-नए विवादित मुद्दों को हवा देना भारत की सुरक्षा दृष्टि से चुनौती भरा कदम है।
विश्लेषकों का कहना है कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया नहीं दे रहा, बल्कि वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की नीतियों को बेनकाब करने की सक्रिय रणनीति अपना रहा है।
भारत और पाकिस्तान के रिश्ते एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं। अरुणाचल और तालिबान जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान की आक्रामक कूटनीति, और यूएन में भारत की सख्त प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि आने वाला समय दक्षिण एशिया की राजनीति के लिए बेहद अहम होने वाला है।
दोनों देशों के बीच यह नया तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।