प्रेमी की हत्या के बाद युवती ने शव से रचाई शादी; बोली—“हार गए पापा और भैया, प्यार जीत गया”
महाराष्ट्र के Nanded से आई यह ख़बर सुन कर कोई भी दंग रह जाएगा — जब प्रेम के नाम पर हुई एक प्रेम-कहानी इतना दर्दनाक मोड़ ले ले, कि मौत के बाद भी मौत को प्यार की जीत समझ लिया जाये। एक युवती ने जिस शख्स से जान–ए–इश्क कहा, उसकी हत्या के बाद — उसके शव से ही शादी रचा दी।
हृदय दहला देने वाली हत्या
इस घटना का केंद्र 20 वर्षीय युवक Saksham Tate है, जिसे उसकी प्रेमिका Aanchal के पिता और भाइयों ने मौत के घाट उतार दिया — वजह, दोनों की अलग-अलग जाति।
पुलिस के अनुसार, पहले युवक की बेरहमी से पिटाई हुई, फिर सिर में गोली मारी गई, और अंत में पत्थर से कुचल कर उसकी हत्या कर दी गई।
शव से शादी — प्रेमिका का सदमे में लिया फैसला
हत्या के बाद जब युवक का शव घर पहुंचा, तब Aanchal बद-हाल हालत में आया। लेकिन उसके गम और सदमे ने उसे ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया कि देखने वाले भी हैरान रह गए। उसने युवक के शव पर हल्दी लगाई, खुद माथे पर सिंदूर भरा, और symbolic — यानी प्रतीकात्मक — शादी कर ली।
उसने यह भी कहा कि वह आजीवन उसके घर में उसकी पत्नी की तरह रहेगी।
पुलिस कार्रवाई और मांगें — मांगी फांसी
घटनास्थल से पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है — कुल मिलाकर 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है, जिनमें Aanchal के पिता, भाई और अन्य शामिल बताए गए हैं।
Aanchal ने आरोपियों को फांसी की सज़ा देने की मांग भी की है। उसकी यह भावनात्मक प्रतिक्रिया, जहाँ एक ओर प्रेम की मजबूती की अंगूठी है; वहीं दूसरी ओर समाज में फैली जात-पातर और ‘ऑनर’ नाम की बरबरी की कुरीति पर मुश्किल सवाल खड़े करती है।
क्या यह सिर्फ एक प्रेम-कहानी है या सामाजिक चेतावनी?
यह घटना दर्शाती है कि भारत के कुछ हिस्सों में जात-पातर और पुरानी सोच कितनी भयानक हिंसा में बदल सकती है।
Aanchal की मौत के बाद भी प्रेमी के शव से शादी करना — उसकी निराशा, गुस्सा, और विरोध का प्रतीक है। मगर यह सवाल भी खड़ा करता है कि ऐसी सोच के खिलाफ समाज, कानून और संवेदना को किस तरह में बदलना होगा।
साथ ही, यह याद दिलाता है कि “प्रेम” और “सम्मान” के नाम पर न जाने कितनी ज़िंदगियाँ दांव पर लग जाती हैं — इसलिए निजी आज़ादी और सामाजिक स्वीकार्यता दोनों ही ज़रूरी हैं।
Nanded की यह त्रासद कहानी सिर्फ एक प्रेम-कहानी नहीं है; यह सामाजिक असहिष्णुता, जात-भेद, और पारिवारिक हिंसा की भयावह सच्चाई का दर्पण है। जहाँ एक तरफ एक युवती ने अपने प्यार के लिए सदमे में प्रतीकात्मक शादी कर अपना दर्द जाहिर किया, वहीं दूसरी तरफ इस घटना ने हमें याद दिलाया कि सामाजिक बदलाव कितने ज़रूरी हैं — ताकि प्यार को मौत या डर के साए में नहीं, सम्मान-समानता के साथ जीने दिया जाए।