करूर भगदड़ केस: सुप्रीम कोर्ट पैनल की जांच शुरू, 1 दिसंबर को घटनास्थल का दौरा….
तमिलनाडु के करूर में हुई भगदड़ की घटना की जांच सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त तीन सदस्यीय पैनल ने शुरू कर दी है। जस्टिस अजय रस्तोगी की अगुवाई में यह पैनल 1 दिसंबर को घटनास्थल का दौरा करेगा और तीन दिन तक निरीक्षण करेगा। इस भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई और 60 से अधिक लोग घायल हुए थे।
जांच का फोकस: हर पहलू पर कड़ी निगरानी**
पैनल घटना स्थल के प्रत्येक हिस्से की विस्तार से जांच करेगा। इसमें रैली की अनुमति, भीड़ नियंत्रण के उपाय और भगदड़ के क्रम की समीक्षा शामिल होगी। पैनल ने करूर जिला प्रशासन के लिए सवालों की एक लंबी सूची भी तैयार की है, जिससे घटना की पूरी गुत्थी सुलझाई जा सके।
सुप्रीम कोर्ट पैनल ने CBI को स्पष्ट चेतावनी दी है कि जांच में किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। पैनल ने जोर दिया कि इस मामले में “पीड़ितों के लिए न्याय ही प्राथमिक उद्देश्य” है।
तमिलनाडु सरकार को निर्देशित किया गया नोडल अधिकारी नियुक्त करने के लिए**
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की CBI जांच के साथ तीन सदस्यीय निगरानी समिति भी नियुक्त की है। समिति ने राज्य सरकार को तत्काल एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं, जो समिति, CBI और सरकार के बीच समन्वय की भूमिका निभाएगा।
भगदड़ कब और कैसे हुई थी**
करूर भगदड़ तब हुई जब अभिनेता-नेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्रि कज़गम (TVK) की रैली चल रही थी। भीड़ नियंत्रण के अभाव और अनुचित व्यवस्थाओं के कारण यह भयावह हादसा हुआ। इस घटना में 41 लोग मरे और 60 से अधिक घायल हुए। सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को इस मामले में CBI जांच का आदेश दिया था।
पैनल के सदस्य और उनकी भूमिका**
- जस्टिस अजय रस्तोगी** – सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज, अध्यक्ष
- सुमंत सरन** – वर्तमान में BSF में प्रतिनियुक्त
- सोनाल वी मिश्रा** – IG, CRPF मुख्यालय
तीनों सदस्य घटना स्थल का दौरा करके गहन निरीक्षण करेंगे और जांच के हर पहलू पर नजर रखेंगे।
न्याय और पारदर्शिता के लिए सुप्रीम कोर्ट की पहल**
यह कदम सुप्रीम कोर्ट की यह स्पष्ट नीति दर्शाता है कि भगदड़ जैसी घटनाओं में जिम्मेदार अधिकारियों और आयोजकों को न्याय के कटघरे में लाना प्राथमिकता है। पैनल की स्वतंत्र जांच और घटनास्थल पर तीन दिन का दौरा मामले की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा।