“धर्म ध्वज का अपमान बर्दाश्त नहीं… उंगली काटने वाले बयान से नवनीत राणा ने छेड़ा नया सियासी विवाद”
“चुनावी मंच पर भड़की तीखी बयानबाज़ी… नवनीत राणा के ‘उंगली काटने’ वाले बयान ने गरमाई राजनीति”
अमरावती की पूर्व सांसद नवनीत राणा ने चुनावी रैली में ऐसा विवादित बयान दे दिया है जिसने राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ा दिया है। ‘धर्म ध्वज’ का अपमान करने वालों पर सख्त प्रतिक्रिया की उनकी अपील अब नए राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है।
रैली में नवनीत राणा का उग्र बयान
चुनावी रैली को संबोधित करते हुए नवनीत राणा ने कहा कि धर्म ध्वज का अनादर करने की कोशिश करने वालों को कड़ा जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि यदि कोई व्यक्ति इस धार्मिक प्रतीक पर उंगली उठाए, तो ऐसी उंगली रहने नहीं देनी चाहिए।
‘धर्म ध्वज’ की आड़ में सियासत गरमाई
राणा के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विरोधी दलों ने इसे भड़काऊ बयान बताया, जबकि उनके समर्थक इसे ‘धार्मिक अस्मिता का बचाव’ बता रहे हैं। चुनावी माहौल में यह मुद्दा तेजी से सियासी रंग पकड़ता दिख रहा है।
समर्थकों को दिए ‘तैयार रहने’ के संकेत
रैली में नवनीत राणा ने अपने कार्यकर्ताओं को ‘सतर्क और तैयार रहने’ का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि धर्म ध्वज सिर्फ एक प्रतीक नहीं, बल्कि आस्था की पहचान है और इसका अपमान किसी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बयान के बाद सोशल मीडिया पर मचा हंगामा
सोशल मीडिया पर राणा के बयान को लेकर बहस छिड़ गई। कुछ उपयोगकर्ताओं ने उनके कथन को असंवैधानिक और उकसाने वाला बताया, जबकि कई लोगों ने धार्मिक भावना की रक्षा के नाम पर उनके समर्थन में पोस्ट किए।
चुनावी रणनीति या आस्था की राजनीति?
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान चुनावी ध्रुवीकरण की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। धार्मिक मुद्दों को आगे कर माहौल को भावनात्मक बनाने की कोशिश अक्सर चुनावी अभियानों में देखी जाती है। राणा का यह बयान भी उसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
कई राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह की भाषा लोकतांत्रिक माहौल को नुकसान पहुंचा सकती है। चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के मद्देनज़र इस बयान को लेकर शिकायतें दर्ज कराने की भी तैयारी चल रही है।
“धर्म के प्रतीक से छिड़ी राजनीति — नवनीत राणा का बयान बना चुनावी बहस का नया केंद्र”