“रामजल सेतु लिंक: ड्रोन सर्वे पूरा, अलवर में नहर निर्माण तेज”
अलवर। रामजल सेतु लिंक परियोजना (RSLP) के तहत बनने वाली करीब 175 किलोमीटर लंबी नहर के लिए ड्रोन सर्वे पूरा हो गया है। सर्वे टीम ने पूरे मार्ग का हाई-रेजोल्यूशन डिजिटल मैप तैयार किया है, जिसमें भू-आकृति, पहाड़ियां, जल स्रोत, आबादी और सरकारी भूमि से जुड़े सभी महत्वपूर्ण डेटा शामिल हैं।
अब जिला प्रशासन इसी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जमीन आवंटन और नहर के अंतिम रूट को तय करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
किस हिस्से से गुजरेगी नहर, सर्वे रिपोर्ट से होगा फाइनल निर्णय
ड्रोन सर्वे में यह भी चिन्हित किया गया है कि कहां-कहां तकनीकी बाधाएं हैं और किन स्थानों पर संरचनात्मक बदलाव की जरूरत पड़ेगी। प्रशासन नहर के लिए सबसे व्यावहारिक और सुरक्षित मार्ग तय करने पर काम कर रहा है, जिससे भविष्य में किसी तरह की तकनीकी दिक्कत न आए।
वन विभाग की जमीन का विकल्प देकर पूरी होंगी कानूनी औपचारिकताएं
सर्वे में यह स्पष्ट हुआ है कि कई स्थानों पर नहर का रूट वन भूमि से होकर गुजरता है। अधिकारियों ने बताया कि इस भूमि की जगह वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। वन विभाग और जिला प्रशासन मिलकर कानूनी प्रक्रिया को पूरा करेंगे ताकि निर्माण में कोई बाधा न आए।
किसानों की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू
नहर मार्ग में आने वाली निजी जमीनों को अधिग्रहित करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। कई क्षेत्रों के पटवारियों ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। जल्द ही यह स्पष्ट होगा कि कितने किसानों की जमीन इसमें आएगी और कुल कितनी भूमि का अधिग्रहण करना पड़ेगा।
परियोजना की कुल लागत 6492 करोड़, पहले चरण में मिलेगा पीने का पानी
रामजल सेतु लिंक परियोजना का पानी करौली जिले के खुर्रा-चैनपुरा क्षेत्र से अलवर लाया जाएगा। अलवर–करौली के मध्य लगभग 150 किलोमीटर दूरी में नहर तैयार होगी।
अलवर को इस परियोजना से 200 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिल सकेगा।
पहला चरण: केवल पेयजल आपूर्ति
दूसरा चरण: किसानों को सिंचाई का पानी
पहले चरण की लागत 3446 करोड़ जबकि पूरी परियोजना पर लगभग 6492 करोड़ रुपए खर्च होंगे। निर्माण एजेंसी को 4.5 वर्ष के भीतर कार्य पूरा करना होगा और 20 साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी उसी की होगी।
नहर का रूट: खुर्रा-चैनपुरा से राजगढ़ होते हुए जयसमंद व घाट बांध तक पानी
करौली के खुर्रा-चैनपुरा गांव से नहर अलवर जिले की राजगढ़ तहसील में प्रवेश करेगी। सबसे पहले पानी धमरेड़ बांध में पहुंचेगा। इसके बाद नटनी के बारां तक इसे ले जाया जाएगा।यहां से दो लिंक नहरें निकाली जाएंगी—पहली जयसमंद बांध की ओर दूसरी रूपारेल नदी मार्ग से घाट बांध तक , जयसमंद बांध से भी दो उप-नहरें निकलेंगी—एक सिलीसेढ़ के लिए , दूसरी कृत्रिम बांध की ओर
17 जिलों को मिलेगा पानी, अलवर को सबसे बड़ा लाभ
परियोजना पूरी होने पर राजस्थान के 17 जिलों को लाभ मिलेगा—जयपुर, झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाईमाधोपुर, दौसा, करौली, धौलपुर, भरतपुर, डीग, अलवर, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, अजमेर, ब्यावर और टोंक।
शुष्क इलाकों के लिए यह योजना जल-संकट दूर करने में निर्णायक साबित हो सकती है।
दो बार बदल चुका है परियोजना का नाम
यह योजना पहले ERCP (Eastern Rajasthan Canal Project) के नाम से जानी जाती थी।
जनवरी 2024 में इसे पीकेसी-ईआरसीपी (Parvati-Kalisindh-Chambal Project) नाम दिया गया।
फिर जनवरी 2025 में इसका नाम बदलकर रामजल सेतु लिंक परियोजना (RSLP) कर दिया गया।
रामजल सेतु लिंक परियोजना पूर्वी राजस्थान की सबसे महत्वाकांक्षी जल योजनाओं में से एक है। ड्रोन सर्वे पूरा होना इस दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि इसी रिपोर्ट के आधार पर भूमि आवंटन, भूमि अधिग्रहण, और नहर का वास्तविक ट्रैक तय होगा। परियोजना पूरी होने पर न केवल अलवर बल्कि 17 जिलों के लिए यह पानी की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित कर सकती है।**