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इमरान खान पर ‘मौत’ की अफवाहों से पाकिस्तान में उबाल—नवाज का बड़ा हमला, सेना और शहबाज की चुप्पी पर उठे सवाल…..

पाकिस्तान में राजनीतिक माहौल अचानक विस्फोटक हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की कथित “जेल में मौत” की अफवाहों ने हालात को तनावपूर्ण बना दिया है। PTI समर्थक जेलों के बाहर इकट्ठा हो रहे हैं, वहीं इमरान की बहनें पुलिस पर हिंसा का आरोप लगा रही हैं। इस बीच, PML-N प्रमुख नवाज शरीफ ने ऐसा बयान दे दिया है जिसने पाकिस्तान की राजनीति ही नहीं, सेना की भूमिका पर भी नया विवाद खड़ा कर दिया है।

अफवाहों से मचा हड़कंप—‘क्या इमरान खान जिंदा हैं?’**

सोशल मीडिया पर तेजी से यह खबर फैली कि इमरान खान जेल में मर चुके हैं।
इन अफवाहों का असर यह हुआ कि:

  • PTI समर्थक जेल के बाहर जुटने लगे
  • कई शहरों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई
  • सरकार और सेना ने चुप्पी साध ली जिससे शक और बढ़ा

सरकारी पुष्टि अब तक नहीं आई, जिससे स्थिति और धुंधली हो गई है।

इमरान खान की बहनों का आरोप—‘हमें मिलने तक नहीं दिया, उल्टा हमला किया’**

इमरान खान की तीन बहनों ने बड़ा दावा किया।
उनका कहना है कि:

  • वे अपने भाई से मिलने जेल पहुंचीं
  • पुलिस ने उनसे बदसलूकी की
  • “क्रूरतापूर्वक हमला” तक किया गया
  • अब परिवार को इमरान खान की स्थिति पर गंभीर चिंता है

चरम तनाव के बीच यह आरोप सरकार पर और दबाव डाल रहा है।

नवाज शरीफ का विवादित बयान—‘इमरान को लाने वाले असली अपराधी’**

PML-N प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इस पूरे माहौल में आग में घी डालने जैसा बयान दिया।
उन्होंने कहा:

“इमरान खान अकेला अपराधी नहीं था… उसे सत्ता में लाने वाले उससे बड़े क्रिमिनल हैं।”

नवाज ने सीधे-सीधे इशारा सेना और मौजूदा सत्ता ढांचे की ओर कर दिया, जो पाकिस्तान में बेहद असामान्य है।

इमरान को कौन लाया सत्ता में?—नवाज का बयान बना नई बहस की शुरुआत**

नवाज शरीफ के इस बयान ने पाकिस्तान की राजनीति में दो बड़े प्रश्न खड़े कर दिए:

  1. क्या जनता ने इमरान खान को प्रधानमंत्री बनाया था?
  2. या सेना ने अपने पसंदीदा नेता को सत्ता दिलाई?

क्योंकि चुनाव आयोग के आंकड़े कहते हैं कि 2018 चुनाव में—

  • PTI सबसे बड़ी पार्टी बनी
  • 270 में से 115 सीटें जीतीं
  • इमरान खान लोकप्रियता की लहर पर आगे आए

अब नवाज का यह बयान सीधे पाकिस्तान की लोकतांत्रिक प्रणाली पर सवाल है।

सेना और शहबाज की चुप्पी—क्या है डर ?
इमरान खान की स्थिति पर न सेना कोई बयान दे रही है, न प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि यह चुप्पी संकेत देती है कि:

  • मामला सामान्य नहीं है
  • राजनीतिक अस्थिरता का डर बढ़ गया है
  • सरकार किसी भी तरह के विद्रोह या दंगे से बचना चाहती है

चुप्पी जितनी लंबी होगी, अफवाहें उतनी ही बढ़ती जाएंगी।

2018 की धांधली पर पुराना विवाद फिर ताज़ा**

नवाज के बयान के बाद लोग फिर से 2018 चुनाव को याद कर रहे हैं।
तब—

  • शहबाज शरीफ ने संसद में धांधली का आरोप लगाया था
  • कहा था कि 16 लाख वोट खारिज किए गए
  • कई जगहों पर सड़कों और नालियों में मतपत्र मिले थे

यानी इमरान की जीत पर पहले भी सवाल उठे थे, लेकिन अब नवाज ने इसे सीधा “क्राइम” बताया है।

स्थिति क्या कहती है?—राजनीतिक संकट का सबसे खतरनाक दौर**

पाकिस्तान में:

  • इमरान पर अफवाहें
  • समर्थकों की नाराज़गी
  • बहनों का हमला-संबंधी आरोप
  • नवाज का विवादित बयान
  • सेना और सरकार की चुप्पी

इन सभी ने मिलकर देश को अस्थिरता के सबसे खतरनाक मोड़ पर खड़ा कर दिया है।

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